फाइनेंशियल इयर 2015-16 के लिए सरकार ने जीडीपी ग्रोथ को लेकर अपने पूर्व के अनुमान को बदलकर 7.9 फीसदी कर दिया है. आरंभिक आंकड़ों में पिछले वित्त वर्ष विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था. लेकिन, केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी पहले संशोधित अनुमान में इसके 7.9 प्रतिशत रहने की बात कही गई है. वित्त वर्ष 2014-15 में जीडीपी विकास दर 7.2 प्रतिशत रही थी. सरकार की तरफ से यह बदलाव एग्रीकल्‍चर और इंडस्ट्रियल प्रोडक्‍शन का डाटा हासिल करने के बाद किया है. सेंट्रल स्‍टैटिस्टिक्‍स ऑफिस (सीएसओ) ने मंगलवार को संशोधित डाटा रिलीज किया.

सीएसओ ने जारी किया आंकड़ा :

सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस ने मंगलवार को संशोधित डेटा जारी करते हुए कहा, ‘2015-16 की रियल जीडीपी 113.58 लाख करोड़ या 2011-12 के हिसाब से कॉन्स्टैंट प्राइस बेस्ड जीडीपी ग्रोथ 105.23 लाख करोड़ रही. इस तरह, 2015-16 में जीडीपी ग्रोथ 7.9% और 2014-15 में 7.2% रही लेकिन 2014-15 के जीडीपी डेटा को दूसरे संशोधन में जस का तस रखा गया है. इसमें कृषि क्षेत्र का विकास अनुमान पहले के 1.2 प्रतिशत से घटाकर 0.8 प्रतिशत, खान एवं खनन का 7.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.3 प्रतिशत, विनिर्माण का 9.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 10.6 प्रतिशत, बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाओं का 6.6 प्रतिशत से घटाकर 5.1 प्रतिशत तथा निर्माण का 3.9 से घटाकर 2.8 प्रतिशत कर दिया गया है. सीएसओ ने पिछले साल 2015-16 की जीडीपी ग्रोथ 7.6% और 2014-15 की ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान दिया था.

नोटबंदी की वजह से 0.25 फीसदी की आएगी कमी :

इकोनॉमिक एडवायजर अरविंद सुब्रह्मण्‍यन के अनुसार डीमोनेटाइजेशन की वजह से जीडीपी ग्रोथ में 0.25-.0.5 फीसदी की कमी आएगी. यह कमी साल 2016-17 के पहले के संभावित अनुमान के आधार पर होगी. उन्होंने यह भी साफ किया है कि यह कमी साल 2015-16 के आधार पर नहीं होगी. सुब्रमण्यन ने कहा कि जीडीपी पर नोटबंदी का असर जानने के लिए काफी डीटेल डाटा चाहिए. उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी के दौरान कैश निकालने पर लगी पाबंदी जीडीपी को मजबूत करने का काम करेगी और इससे टैक्‍स वसूली में लंबी अवधि में फायदा होगा. सुब्रह्म़ण्‍यन ने कहा कि वित्‍त वर्ष 2017 में नोटबंदी की वजह से 25 से 50 बेसिस प्‍वाइंट्स की कमी आएगी.

मंगलवार को जारी इंडेक्स ऑफ एट कोर इंडस्ट्रीज के डेटा के मुताबिक, दिसंबर में 5.6% ग्रोथ दिखानेवाला यह इंडेक्स नवंबर में 4.9% बढ़ा था जबकि अप्रैल से दिसंबर 2016 के बीच इसकी कमुलेटिव ग्रोथ 5% रही है. अहम इंडस्ट्रियल सेक्टर के प्रॉडक्शन के बारे में बताने वाले ये डेटा मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ने मंगलवार को जारी किए.

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