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अगर अभी चुनाव हुए तो फिर बनेगी मोदी सरकार- पढ़े यह ख़ास सर्वे की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री मोदी की एनडीए सरकार का लगभग आधा कार्यकाल पूरा हो गया है, लेकिन अभी भी वह लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. इसका सबूत है हाल ही में आया इंडिया टुडे ग्रुप और कार्वी इनसाइट (karvy insights) का सर्वे. इस सर्वे के मुताबिक अगर अभी देश में लोकसभा चुनाव हो जाएं तो मोदी सरकार को 360 सीटें मिलेंगी और दोबारा से जीत दर्ज कर सत्ता में आ जाएगी. वहीं दूसरी ओर, मौजूदा समय में लोकसभा चुनाव होने के बाद यूपीए को सिर्फ 60 सीटें और अन्य को 123 सीटें मिलेंगी.

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पीएम के रूप में मोदी का जलवा कायम :

अभी चुनाव होने की स्थिति में 65 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में चुना. इसके अलावा 10 फीसदी लोगों ने राहुल गांधी और 4 प्रतिशत लोगों सोनिया गांधी को अपनी पसंद बताया. इतना ही नहीं एक फीसदी लोगों को मुलायम सिंह और एक फीसदी को मायावती पीएम के रूप में पसंद हैं. यही नहीं, 2 फीसदी लोग अरुण जेटली, एक फीसदी अमित शाह, एक फीसदी को ममता बनर्जी, 2 फीसदी केजरीवाल, 2 फीसदी प्रियंका गांधी और 2 फीसदी लोगों ने नीतीश कुमार को पीएम के रूप में चुना.

मोदी सरकार को जबर्दस्त समर्थन :

19 राज्यों में 12,143 लोगों पर किए गए सर्वे के मुताबिक यदि तत्काल चुनाव होता है तो बीजेपी की लीडरशिप वाले एनडीए को 42 पर्सेंट वोट मिलेंगे, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन को महज 25 पर्सेंट वोट ही मिल सकेंगे. वहीं अन्य दलों को 33 फीसदी वोट मिले. प्रधानमंत्री के तौर पर पीएम मोदी के काम को 69 फीसदी लोगों ने अच्छा बताया. वहीं दूसरी ओर 19 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री के तौर पर पीएम मोदी के काम को औसत कहा, जबकि 3 प्रतिशत लोगों ने खराब बताया. इतना ही नहीं, 6 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी के काम को बेहद खराब बताया. इन सबके बावजूद 71 फीसदी लोगों ने एनडीए सरकार के काम को सराहा.

नोटबंदी के साथ लोग :

पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले को भी लोगों का बंपर समर्थन मिलता दिख रहा है. सर्वे में 45 पर्सेंट लोगों ने माना है कि इससे ब्लैक मनी पर लगाम कसी जा सकेगी, जबकि 35 पर्सेंट ने इसे इकॉनमी के लिए अच्छा करार दिया है. हालांकि 7 पर्सेंट लोगों का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था कमजोर होगी, जबकि 7 पर्सेंट लोग इस सिर्फ चुनावी चाल करार दे रहे हैं. इस फैसले से कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद 58 पर्सेंट लोगों ने जताई, जबकि 34 फीसदी मानते हैं कि इससे कोई खास असर नहीं होने वाला है.

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