नोटबंदी के बाद घाटी की हिंसा में आयी 60 प्रतिशत की गिरावट, आतंकवाद पर भी लगी है रोक!

नोटबंदी भारतीय इतिहास का सबसे क्रांतिकारी कदम साबित हुआ है। नोटबंदी की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने काले धन पर रोक लगाने के लिए लिया था, लेकिन इससे कई फायदे हुए। अभी एक सर्वे में पाया गया है कि कश्मीर में नोटबंदी के बाद से 60 प्रतिशत कम हिंसा की घटनाएँ हुई हैं। इसके बाद से अफसरों द्वारा होने वाली दलाली में भी कमी आयी है। सूत्रों के अनुसार इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों के नक्सलियों की समस्या में भी कमी देखी गयी है।

बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए आतंकी:

नोटबंदी के बाद से आतंकवादी ना ही अपने हथियार खरीद पा रहे हैं और ना ही अपने जरुरी सामान, पैसे की कमी के वजह से उनका स्थानीय नेटवर्क भी बहुत कमजोर हो चुका है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में आतंकवादी सुरक्षाबलों के हाथों मारे जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार यह भी पता चला है कि पुर्वोतार राज्य के नक्सली कमांडर भी भारतीय सीमा से बाहर भाग गए हैं। इसके साथ ही हवाला के काम में भी काफी कमी आयी है, हवाला कारोबारियों की कमर टूट गयी है।

आतंकियों का नेटवर्क हो चुका है कमजोर:

एजेंसी के अनुसार जहाँ पहले आतंकवादी स्थानीय लोगों को पैसे का लालच देकर मुखबिरी करवाते थे, वहीँ नोटबंदी के बाद से आतंकी किसी को पैसे नहीं दे पा रहे हैं। इस वजह से उनका नेटवर्क भी बहुत कमजोर हुआ है। इसके चलते आतंकी सुरक्षाबलों के सामने घुटने टेकने को मजबूर हो गए हैं। नोटबंदी के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य होने से 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 98 प्रतिशत विद्यार्थियों में हिस्सा लिया है।

पत्थारबाजों पर लगी रोक:

रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में घाटी में केवल एक विस्फोट की घटना सामने आयी थी। आतंकियों के पास पैसे की बहुत ज्यादा किल्लत हो गयी है, इस वजह से पत्थरबाजी पर भी पूरी तरह से रोक लग गयी है। पहले आतंकी स्थानीय लोगों को पैसे देकर उनसे पत्थरबाजी करवाते थे। ख़बरों के अनुसार नकली नोटों की छपाई को भी रोक दिया गया है।

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