अध्यात्म

तो इस वजह से फेरों के समय दुल्हन को बैठाया जाता है दूल्हे की बायीं तरफ

हिंदू धर्म के तहत होनेवाली शादी से पहले ही शादी से जुड़ी रस्में शुरू हो जाती हैं और ये रस्में कई तरह की होती हैं. जैसे की हल्दी, मेंहदी और इत्यादि. इन रस्मों के होने के बाद शादी वाले दिन अग्नि देव से सामने फेरे लेकर, लड़की की मांग में सिंदूर भरकर और  मंगलसूत्र पहनाकर उसे लड़का अपनी पत्नी बनता है. वहीं शादी के समय होने वाले फेरे के दौरान लड़की के बैठने का स्थान भी बदल दिया जाता है और चौथे या फिर तीसरा फेरा होते हीं लड़की को लड़के के बायीं तरफ बैठा दिया जाता है. जिसके बाद से लड़की किसी भी पूजा या हवन होने पर अपने पति के बायीं और ही बैठती है.

पहले बैठाया जाता है दायीं तरफ की और

शादी शुरू होने के दौरान लड़की को मंडप पर लाकर उसके माता पिता पहले लड़की को लड़के के दायने और बैठाते है और जब फेरे होने लगते हैं तो उस दौरान उसका स्थान लड़के के बायीं और कर दिया जाता है. आप लोगों ने ये चीज कई शादी में जरूर देखी होगी. लेकिन क्या आपको पता है कि क्यों लड़की का स्थान शादी के दौरान बदल दिया जाता है और उसे क्यों शादी के बाद हमेशा अपने पति के बायीं और ही बैठना होता है.

आखिर क्यों पत्नी अपने पति के बायीं और बैठती है

हमारे धर्म में सदियों से ही ऐसा चला आ रहा है और शास्‍त्रों में भी लड़की के स्थान का जिक्र करते हुए कहा गया है कि हमेशा मां लक्ष्‍मी श्री विष्‍णु के बायीं और ही बैठती हैं और स्त्री का लड़के की बायीं ओर ही बैठना उत्तम होता है. हिंदू धर्म के अनुसार लड़की के बाएं तरफ को शुभ माना जाता है और इसी तरह से लड़के के दाएं तरफ को शुभ माना जाता है. ऐसा कहा गया है कि स्त्री का स्वभाव प्रेम और ममता से भरा होता है और उसके भीतर रचनात्मकता होती है, जबकि लड़के शूरवीर और दृढ का प्रतीक होते हैं. ज्‍योतिष शास्‍त्री में लिखा गया है कि पत्नी का स्थान हमेशा अपने पति के बायीं ओर होता है, क्‍योंकि लड़की का बाईं तरफ होना प्रेम और रचनात्मकता को दर्शता है. जबकि लड़के का दाएं तरफ होना दृढ़ता से दर्शता है. इसी तरह से जब भी ज्योतिष लड़की का हाथ देखता है तो वो लड़की के बाएं हाथ की ही रेखा देखता है, जबकि पुरुष का दायां हाथ ज्योतिष द्वारा देखा जाता है.

अन्य धर्म में भी है लड़की का यही स्थान

अगर आपको लग रहा है कि केवल हमारे धर्म में ही शादीशुदा लड़की के पति के साथ बैठने का स्थान निश्चित किया गया है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है.  क्रिश्‍चियन धर्म के तहत होने वाली शादी के समय भी लड़की और लड़के का स्थान, हिंदू धर्म के तहत होने वाली शादी की तरह ही होता है और क्रिश्‍चियन शादी के दौरान दुल्‍हन आकर अपने होने वाली पति की बायीं ओर खड़ी होती है. क्रिश्‍चयन धर्म के अनुसार लड़के का लड़की के दायीं और होना लड़की की रक्षा को दिखाता है और लड़के ताकत का प्रतीक होते है.

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