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आरबीआई ने पहले ही की थी नोटबंदी की सिफारिश

8 नवम्बर 2016 एक ऐतिहासिक तिथि बन चुकी है, क्योंकि इसी तिथि पर मोदी सरकार ने अपने अबतक के कार्यकाल का सबसे बड़ा फैसला लिया था. लेकिन नोटबंदी जैसा फैसला सरकार यूँ ही अचानक नहीं ले सकती. हालांकि रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 में ऐसे प्रावधान दिये गये हैं कि केंद्र सरकार कभी भी नोटबंदी जैसा फैसला ले सकती है लेकिन उसके कुछ नियम हैं. सरकार अपने हिसाब से फैसले नहीं कर सकती.

करेंसी नोट जारी करने का अधिकार केवल रिज़र्व बैंक के पास ही है

भारत में एक रूपये से अधिक के करेंसी नोट जारी करने का अधिकार केवल रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पास ही है, ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि सरकार ऐसा फैसला अपने हिसाब से कैसे ले सकती है. सरकार ऐसा फैसला खुद नहीं कर सकती बल्कि आरबीआई के केन्द्रीय बोर्ड की सिफारिश पर ही सरकार नोटबंदी जैसा फैसला ले सकती है.

दरअसल मोदी सरकार के ऐलान से कुछ घंटे पहले रिज़र्व बैंक ने केंद्र सरकार से एक सिफारिश की थी, आरबीआई बोर्ड ने 8 नवंबर को अपने केंद्रीय बोर्ड में नोटबंदी का प्रस्ताव पारित किया था.

एक आरटीआई के जवाब में आरबीआई ने बताया कि उसके निदेशक मंडल ने 8 नवम्बर को एक बैठक में नोटबंदी का प्रस्ताव पास कर लिया था और केंद्र को इसकी सिफारिश भी भेजी गई थी. इस बैठक में केवल 8 बोर्ड मेम्बर्स ने ही हिस्सा लिया था. आरबीआई बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के दो मेम्बर्स इस बैठक में शामिल नहीं हो सके थे. बैठक में आरबीआई चीफ उर्जित पटेल, कम्पनी मामलों के सचिव शशिकांत दास, रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर आर गांधी और एसएस मुंद्र भी शामिल थे.

मोदी सरकार ने बेहद कम समय में इस फैसले के बारे में विचार करके कबिनेट बैठक की और मंत्रियों को जानकारी दी और रात 8 बजे फैसला सबके सामने आ गया

लंबे अर्से से चल रही थी नोटबंदी की तैयारी

गौर करें तो ऐसा करना इतना आसन नहीं है, बिना पूरी तैयारी के नोटबंदी का फैसला कैसे किया जा सकता है? अटकलें लगायी जा रही हैं कि आरबीआई में प्रस्ताव पारित करना केवल औपचारिकता थी. इसकी तैयारी पहले ही चल रही थी. वहीँ दूसरी तरह कम्पनी मामलों के सचिव शशिकांत दास का कहना है कि प्रक्रिया पर ध्यान ना दिया जाये, फैसले के परिणाम को देखा जाये, शशिकांत दास का बयान भी कई सवाल खड़े करता है.

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