क्या आपको पता है कि पुलवामा हमले में मारे गए जवानों को नहीं मिलेगा शहीद का दर्जा

न्यूज़ट्रेंड वेब डेस्क: पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की निंदा पूरी दुनिया में हो रही है। देश के 42 शहीदों ने अपनी जान गवाई है। इस हमले के बाद से हर किसी के मन में काफी गुस्सा और दर्द हैं। हम लोग जो अपने घरों में चैन की नींद सो रहे हैं वो इन्हीं जवानों की वजह से। देश के लाल आज देश की माटी में जा मिले हैं। देश के लिए शहीद हुए इन जवानों के लिए कई दिनों तक सभी मीडिया और न्यूज चैनल वाले कई तरह के प्रोग्राम लाएंगे। यहां तक की भारत सरकार ने भी इस घटना पर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी हैं और बदला लेने की भी बात की हैं। लेकिन आज जहां हर कोई इन जवानों को शहीद कह रहा है, लेकिन शायद ही आपको ये बात पता हो कि इनको भले ही आज शहीद कह रहे हैं लेकिन सरकारी दस्तावेजों में इनको शहीद का दर्जा नहीं दिया जाएगा।

क्या होता है शहीद का दर्जा

बता दें कि थलसेना, सेना या वायुसेना के जवान ड्यूटी के दौरान अगर जान देते हैं तो उन्हें शहीद का दर्जा मिलता है। थलसेना, नौसेना या वायुसेना रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है। शहीद का दर्जा मिलने वाले के परिवार को पेंशन मिलती है उनका इलाज, कैंटीन की जो भी सुविधाएं होती हैं वो उस जवान के परिवार वालों को मिलती हैं। साथ ही राज्य सरकार में नौकरी में कोटा, शिक्षण संस्थान में उनके बच्चों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं।

पैरामिलिट्री फोर्स को नहीं मिलता शहीद का दर्जा

वहीं पैरामिलिट्री फोर्सेस जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी या किसी भी पैरामिलिट्री फोर्स के जवान यदि  अपनी ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं तो उनको शहीद का दर्जा नहीं मिलता है। बता दें कि सेना पर देश के बाहरी हिस्से की जिम्मेदारी होती हैं तो वहीं सीआरपीएफ या पैरामिलिट्री फोर्सेज पर आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी का भार होता है। यदि कोई भी पैरामिलिट्री का जवान किसी भी आतंकी या नक्सली हमले में मारा जाता है तो उसकी सिर्फ मौत होती हैं उसको शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता है। यहां तक की पैरामिलिट्री के जवानों को पेंशन की सुविधा भी नहीं मिलती है।  बता दें कि पैरामिलिट्री गृह मंत्रालय के तहत काम करते हैं।

इस ऐप से कर सकते हैं इन जवानों के परिवार की मदद

बता दें कि साल 2017 में गृह मंत्रालय ने बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार के सुझाव पर “भारत के वीर” नाम की एक वेबसाइट और ऐप तैयार किया था। जिसमें देश की आंतरिक सेवा में तैनाती के दौरान शहीद हुए जवान का ऑनलाइन ब्योरा सार्वजनिक किया जा सके जिससे देश का प्रत्येक व्यक्ति शहीद जवान के परिवार को मदद मुहैया करा सके।