वित्त मंत्रालय ने फण्ड ट्रान्सफर पर बैंकों को दिया 50 पैसे राहत देने का निर्देश

कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये मोदी सरकार हर संभव प्रयास करने में जुट गई है. गुरुवार को वेतन भुगतान अधिनियम से जुड़ा अध्यादेश लाने के बाद एक और घोषणा की गई है, नई घोषणा बैंकिंग प्रणाली से जुडी हुई है. नये नियम के अनुसार अब इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रान्सफर की सेवा लेने पर आपको छूट मिलेगी. यानि कि फण्ड ट्रान्सफर पर सर्विस चार्ज और टैक्स के रूप में पहले से कम रकम का भुगतान करना होगा.

इमीडिएट पेमेंट सिस्टम (IMPS) :

सरकार ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वो इमीडिएट पेमेंट सिस्टम (IMPS) और यूपीआई के जरिये एक हजार से ज्यादा की रकम के फंड ट्रांसफर पर एनईएफटी (NEFT) के बराबर सेवा शुल्क लें.

इससे पहले रिज़र्व बैंक के नियमों के अनुसार एनईएफटी के माध्यम से दस हजार तक के फण्ड ट्रान्सफर पर 2.5 रूपये के सर्विस चार्ज देना होता था, वहीं एक दस हजार से एक लाख की रकम तक के NEFT ट्रान्सफर पर 5 रूपये सेवा शुक्ल लगता था और एक लाख से दो लाख रूपये तक के फण्ड ट्रान्सफर पर 15 रूपये जबकि 2 लाख से अधिक की रकम ट्रान्सफर करने पर 25 रूपये तक सेवा शुल्क और सेवा कर भी देना होता था.

सेवा शुक्ल के बाद सेवा कर अतिरिक्त रूप से देना होता था, सेवा शुक्ल बैंक के लिये और सेवा कर सरकार के लिये.

वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि एक हजार से ज्यादा की रकम के USSD ट्रांजेक्शन पर पचास पैसे की रियायत देने की जरूरत है, USSD सेवा के जरिये किसी भी फोन से SMS के जरिए बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाया जा सकता है, वर्तमान में इसका शुल्क डेढ़ रूपये निर्धारित है, लेकिन 31 दिसम्बर तक इस सेवा को मुफ्त रखा गया है.

सरकार का कहना है कि डिजिटल और कार्ड से भुगतान बढ़ावा देने के लिये यह दिशा निर्देश दिये गये हैं, ऐसा इस लिये किया गया है ताकि सरकारी बैंक IMPS और UPI के माध्यम से फण्ड ट्रान्सफर करने पर NEFT की निर्धारित शुल्क से ज्यादा ना वसूल पायें, दूसरी तरफ इसपर सर्विस टैक्स की रकम में कोई बदलाव नहीं किया गया है, सेवा कर वैसे का वैसे ही चार्ज किया जायेगा. मंत्रालय का यह निदेश फ़िलहाल 31 मार्च 2017 तक के लिये लागू होगा.

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