जब दी जा रही थी राजनीति की बड़ी जिम्मेदारी, तो प्रियंका नहीं रहीं मौजूद, सामने आई बड़ी वजह

बुधवार के दिन भारतीय राजनीति में एक बड़ी खबर सामने आई, कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी को राजनीति में उतार दिया. आपने आजतक प्रियंका को राजनीति मुद्दों पर बोलते तो देखा होगा लेकिन असल में किसी पद पर उनकी नियुक्ति नहीं की गई थी. अब प्रियंका गांधी वाड्रा ने आधिकारिक तौर पर राजनीति में एंट्री ले ली है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका को ईस्ट यूपी की कमान सौंपी लेकिन उस दौरान एआईसीसी की महासचिव (यूपी ईस्ट की प्रभारी) बनीं प्रियंका गांधी अमेरिका में रहीं. प्रियंका गांधी अमेरिका से 1 फरवरी को वापस भारत आएंगी और फरवरी के पहले सप्ताह में अपना कार्यभार संभाल लेंगी. मगर बड़ी बात ये हुई कि जब दी जा रही थी राजनीति की बड़ी जिम्मेदारी, तो प्रियंका नहीं रहीं मौजूद, ऐसा क्या था जो प्रियंका उस दौरान यहां नही मौजूद हो पाईं.

जब दी जा रही थी राजनीति की बड़ी जिम्मेदारी, तो प्रियंका नहीं रहीं मौजूद

ऐसा पहली बार हुआ जब कांग्रेस में प्रियंका गांधी को ऑफिशियल तौर पर कोई पद दिया गया. इस संबंध में पार्टी के महासचिव अशोल गहलोत की तकफ से एक प्रेस जारी की गई जिसमें लिखा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रियंका गांधी वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश की महासचिव के तौर पर नियुक्ति दी है. वह फरवरी के पहले सप्ताह में अपना पद और कार्य संभालेंगी.’ वहीं प्रियंका गांधी को यूपी ईस्ट का प्रभारी बनाए जाने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांदी ने अपनी खुशी जाहिर की.

राहुल ने कहा, ”मेरी बहन बहुत काबिल है, मैं बहुत खुश हूं कि अब वो मेरे साथ काम करेंगी. मैं यूपी के लोगों से कहना चाहता हूं कि बीजेपी को हटाओ और हमें चांस दो. हम आप लोगों को एक नई दिशा देंगे और यूपी को नंबर वन राज्य बना देंगे.” राहुल गांधी ने कहा कि प्रियंका के राजनीति में आने पर बीजेपी वाले घबरा गए हैं. राहुल गांधी ने अपनी खुशी जाहिर की और ये भी बताया कि इस समय प्रियंका अमेरिका में अपनी बेटी मिराया वाड्रा का इलाज करा रही हैं और 1 फरवरी तक बेटी के साथ यहां वापस आकर अपना कार्यभार संभाल लेंगी.

क्या है कांग्रेस का मिशन 30 का फॉर्मूला

अगले लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा ने गठबंधन करके कांग्रेस को ठेंगा दिखा दिया और ऐसे में प्रदेश की सभी 80 सीटों पर इन दोनों दलों ने करारा जवाब देने की सोच ली है. इस गठबंधन के बाद कांग्रेस ने भी ठोस राजनीति कदम उठाए और इसके लिए उन्होंने मिशन 30 का फॉर्मूला तैयार कर लिया है. मिशन 30 यानी वो सीटें जहां पर कांग्रेस को साल 2014 में सहारनपुर की सीट पर कांग्रेस के इमरान मसूद 4 लाख वोटों से दूसरे नंबर पर रहे. बीजेपी के उम्मीदवार को यहां पर 4.77 लाख वोट से जीत मिली थी. जबकि बसपा और सपा को सिर्फ 3 लाख वोट मिले थे तो ऐसे में अगर कांग्रेस अकेली वहां लड़ती है तो फिर इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. इसलिए कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को मैदान में उतार दिया है और 47 साल की प्रियंका को योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी दे दी गई है.

अब ऐसा लगता है कि लोकसभा-2019 चुनाव में लोकसभा का चुनाव अलग और कांग्रेस, बेजीपी और बुआ-भतीजे की लड़ाई अलग होने वाली है. पूरे भारत से ज्यादा यूपी पर लोगों की नजर रहने वाली है. अब लोकसभा चुनाव और भी दिलचस्प होने वाला है.