मिडल क्लास पिता ने अपने बच्चों के लिए बनाया ये खास ‘मिनी ऑटो’, वजह जानेंगे तो आंख भर आएगी

हर मां-बाप अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं. वह अपने बच्चों की छोटी सी छोटी ख्वाइश  पूरी करने की कोशिश करते हैं. कहते हैं कि मां अपने बच्चों से सबसे ज्यादा प्यार कारती है और चाहे कुछ भी हो जाए अपने बच्चों को तकलीफ में नहीं देख सकती. लेकिन एक पिता के प्यार की कोई सीमा नहीं होती. भले ही एक पिता बच्चों को दिखाता नहीं लेकिन वह उनसे सबसे ज्यादा प्यार करता है. एक पिता दिन रात मेहनत करता है ताकि वह अपने परिवार को ऐशो-आराम वाली जिंदगी दे सके. जहां एक मां अपना प्यार जाहिर कर देती हैं वहीं पिता खुलकर अपना प्यार जाहिर नहीं कर पाता. पिता परिवार की नींव होता है. एक पिता की यही कोशिश रहती है कि वह अपने बच्चों की सभी जिद्द को पूरा कर सके. भले ही उनकी जिद्द को पूरी करने के लिए उन्हें तकलीफों से गुजरना पड़े. आज के इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसे ही मिडल क्लास पिता की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए एक ऐसा काम किया है जिसकी सराहना पूरी दुनिया कर रही है.

बेटे का सपना किया पूरा

बता दें, केरल के रहने वाले अरुण कुमार पुरुशोथमन ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल, अरुण कुमार के बेटे माधवकृष्णा को 1990 की रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म ‘ए ऑटो’ बेहद पसंद है. उसकी ख्वाइश थी कि उसके पास एक ऐसा ऑटो हो जिसमें बैठकर वह जब मर्जी घूमने-फिरने के लिए जा सके. वह अपने पिता से कई बार अपनी इस अनोखी ख्वाइश के बारे में बात कर चुका था. वह बहुत एक्साइटमेंट के साथ पिता को अपनी ये ख्वाइश बताता था. पिता ने जब देखा कि बेटा सच में ऐसा चाहता है तो उन्होंने उसकी ये इच्छा पूरी करने के बारे में सोच लिया. माधव अपने बेटे को लाख रुपये वाला बड़ा ऑटो तो नहीं दे सकता था क्योंकि उसका बेटा अभी छोटा था. उसे पता था कि उसने केवल फिल्मों में देखा है, वह अभी इस उम्र में ऑटो चला नहीं पायेगा. लेकिन फिर भी पिता ने उसका सपना पूरा करने की ठानी और एक बढ़िया सा जुगाड़ लगा लिया.

बना डाला ‘मिनी ऑटो’

बता दें, बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अरुण ने खुद एक छोटा सा ‘मिनी ऑटो’ बना दिया. लेकिन आपको बता दें ये ऑटो केवल खिलौना मात्र नहीं है बल्कि ये एक ऑटो की तरह चलता है और इसके अंदर वह सारे फंक्शन मौजूद हैं जो एक ऑटो में होते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर अरुण ने ये कारनामा कैसे कर दिया? तो बता दें बचपन से ही अरुण वाहनों में दिलचस्पी रखता था. उसे भी बचपन में ऐसे खिलौनों की ख्वाइश होती थी लेकिन पिता के गरीब होने के कारण उसे ऐसे बड़े-बड़े खिलौने नहीं मिल पाते थे. एक बार उसके पिता ने उसे लकड़ी से बनी साइकिल दी तो उसने उससे ढेर सारे छोटे-छोटे खिलौने बना दिए. इतना ही नहीं, अरुण ने 10वीं में JCB मशीन का वर्किंग मिनी मॉडल बनाया था. अरुण ने कहा कि जब वह घर पर खुद ही ऐसी कारें और ऑटो बना सकता है तो मार्केट में हजारों रुपये वाली टॉय कार लेने का कोई मतलब नहीं बनता.

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