दीपावली पर घरों के मुख्य द्वार पर बनाएं इस डिजाइन की रंगोली, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

न्यूज़ट्रेंड वेब डेस्क:  दीपावली के त्यौहार पर घरों को सजाया जाता है, इस त्यौहार में घरों में रंगोली बनाने की प्रथा भी है। घर के मुख्य द्रार से लेकर पूजा के स्थान पर रंगोली बनाना शुभ माना जाता है। बाजारों में रंगोली बनाने की पूरी सामग्री आसानी से मिल जाती है, साथ ही आप किस तरह की रंगोली का डिजाइन बनाना चाहते हैं उस तरह की डिजाइन भी बाजार में आसानी से उपलब्ध है। आप रंगों से लेकर, फूलों और पेंट से भी दीवाली पर रंगोली बना सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि आप दीवाली पर घर के मुख्य द्वार पर मोर की डिजाइन वाली रंगोली बनाती हैं तो उससे लक्ष्मी माता प्रसन्न होती हैं औऱ घर में आगमन करती हैं। इस दिन लोग आटे से चौक पूरकर और भी तरह-तरह की रंगोली बनाते हैं। तो आपको हम बताएंगे कि आप किस प्रकार से रंगोली बनाकर(Diwali Rangoli Design) अपने घर को और सुंदर बना सकती हैं।

यदि आप इको फ्रैंडली रंगोली बनाने की सोच रहे हैं तो आप फूलों का इस्तेमाल करके भी रंगोली बना सकती हैं। लेकिन आपको फूलों की रंगोली बनाने के लिए उसकी डिजाइन पर विशेष ध्यान देना होगा। तो आइए हम आपको यहां कुछ फूलों की रंगोली की तस्वीरें दिखाते हैं जिन्हें देखकर आप असानी से और शानदार रंगोली से अपने घरों में सजा सकेंगे। ऐसी रंगोलियां दक्षिण भारत के राज्य केरल में और किसी बड़े उत्सव में अक्सर देखने को  मिलती है।

 इको फ्रैंडली रंगोली (Diwali Rangoli Design)

Diwali Rangoli design

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इसके अलावा आप बाजार में मिलने वाले रंगोली के रंगों से भी रंगोली बना सकते हैं। यहां देखिए बूरे से बनाई गई रंगोली की डिजाइंस-

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आप पेंट या वाटर कलर से भी रंगोली बना सकती है, ये रंगोली अधिक समय तक टिकी रहती हैं। देखें पेंट से बनी रंगोलियों के कुछ डिजाइंस-

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क्यों बनाई जाती है रंगोली

भारत में त्यौहारों पर रंगोली बनाने का रिवाज़ काफी पुराना है। रंगोली एक संस्कृत का शब्द है,  जिसका मतलब है रंगों के जरिये भावनाओं को अभिव्यक्त करना।

भारत के कुछ क्षेत्रों में रंगोली को अल्पना के नाम से भी जाना जाता है। अल्पना भी एक संस्कृत शब्द ‘अलेपना’ से बना है, जिसका अर्थ है लीपना अथवा लेपन करना.

बता दें कि भारत में रंगोली की आगमन मोहन जोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता से जुड़ा हुआ है। इन दोनों ही सभ्यताओं में मांडी और आलेपन की विभिन्न-विभिन्न आकृतियों के कई निशान मिलते हैं। बात करें अल्पना की तो यह वात्स्यायन के काम-सूत्र में वर्णित चौंसठ कलाओं में से एक है। ऐसा माना जाता है कि इस कला का सीधा संबंध 5,000 वर्ष पूर्व की मोहन जोदड़ो की कला से है। (Diwali Rangoli Design)

इसे लेकर कई कथाएं भी प्रचलित हैं-

एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार एक बार राजा चित्रलक्षण के दरबार के पुरोहित के पुत्र का अचानक देहांत हो गया. पुरोहित के पुत्र के खोने का दुख देखकर राजा ने भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना की, जिसके बाद ब्रह्माजी प्रकट हुए और उन्होंने राजा से पर उस पुत्र का चित्र बनाने के लिए कहा, जिसकी मृत्यु हुई थी। राजा ने तुरंत ही दीवार पर एक चित्र बनाया और देखते ही देखते उस चित्र से ही राजदरबार के पुरोहित के मृत पुत्र का पुन: जन्म हुआ।

रंगोली को लेकर एक और कथा प्रचलित है जिसके मुताबिक एक बार ब्रह्मा ने सृजन के उन्माद में आम के पेड़ का रस निकाल कर उसी रस से ज़मीन पर एक स्त्री की आकृति बनाई थ, उस स्त्री का सौंदर्य अप्सराओं को मात देने वाला था, बाद में वही स्त्री उर्वशी कहलाई। ब्रह्मा द्वारा खींचीं गई यह आकृति रंगोली का प्रथम रूप है।

रंगोली से जुड़ी मान्यताएं

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंगोली महज़ एक घर को सजाने वाली वस्तु नहीं है, बल्कि  रंगोली की आकृतियां घर से बुरी आत्माओं एवं दोषों को दूर रखती है।

ऐसा माना जाता है कि रंगोली की विभिन्न प्रकार की आकृतियां नकारात्मक ऊर्जा को रोककर वापस बाहर की ओर प्रवाहित कर देती हैं।

भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु को लेकर ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र की पूजनीय देवी ‘मां थिरुमाल’ का विवाह ‘मर्गाजी’ महीने में हुआ था. इसीलिए इस पूरे माह के दौरान इस क्षेत्र के हर घर में कन्याएं सुबह उठकर नहा धोकर रंगोली बनाती हैं।

बदलते वक्त के साथ-साथ रंगोली बनाने की लोककला में भी काफी बदलाव हुए हैं, लेकिन हकीकत यह भी है कि ज़माना चाहे कितना भी बदल जाए, पर आज भी सभी धार्मिक अवसरों पर रंगोली(Diwali Rangoli Design) बनाई जाती है।

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