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#Metoo: कौन सच्चा कौन झूठा, कैसे होगा साबित!

न्यूज़ट्रेन्ड बॉलीवुड डेस्क : आज आप मनोरंजन जगत की कोई खबर अगर पढ़ना चाहेंगे तो आपको सिर्फ दो तरह की खबरें मिलने वाली हैं। एक तो बिग बॉस के घर में क्या चल रहा है औऱ दूसरे #Metoo आंदोलन जिसमें एक के बाद एक लगातार बॉलीवुड के बड़ी औऱ मशहूर हस्तियों के नाम सामने आ रहे हैं। अगर बिग बॉस की बात करें ते ये शो अभी तक के सारे शो को टीआरपी में पीछे किये हुए था, लेकिन जब असल जिंदगी में वो भी बॉलीवुड के लोगों के बीच जंग छिड़ी हो तो बिग बॉस की लड़ाई भी लोगों को कम दिलचस्प लगने लगती है।

मुद्दा यहां ये है कि #Metoo अब कई लोगों की गले की फांस बनता जा रहा है। सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि बड़े खुलासे हो रहे हैं बल्कि मर्दों के दिल में डर बैठ गया है कि कभी उनके किए गए किसी मजाक को कोई औरत आज मीटू के नाम पर आरोपित ना घोषित करे। बात करते हैं एक दम शुरुआत से। वैसे तो कॉस्टिंग काउच से लेकर यौन शोषण का मुद्दा है पुराना, लेकिन ये चर्चा में आया 10 साल पहले हुई एक घटना से।

10 साल पहले तनुश्री ने नाना पाटेकर ने आरोप लगाया था कि फिल्म हॉर्न ओके के सेट पर नाना ने उनके साथ जबरदस्ती की थी। उ वक्त उन्होंने इस बात की शिकायत की तो डॉयरेक्ट ने उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब 10 साल बाद तनुश्री पर्दे पर तो नहीं लौटी, लेकिन वापस आते ही एक बार फिर इस मुद्दे को उन्होंने पब्लिक के सामने रख दिया। इस बार इस बात को ज्यादा तवज्जो दी गई और नाना से सवाल पूछे गए। नाना का कहना है कि जो सच ह वो बदल नहीं सकता और ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।

बॉलीवुड में कई एक्ट्रेस ने तनुश्री का सपोर्ट किया। तनुश्री को सपोर्ट करते हुए कुछ एक्ट्रेस ने खुद के दर्द भी बयां कर दिए। कंगना ने बताया कि वाकस बहल ने उनके साथ गलत करने की कोशिश की थी। कैलाश खैर पर भी यौन शोषण के आरोप लग गए और सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब तथाकथित संस्कारी बाबूजी यानी आलोकनाथ और पूर्व विदेश मंत्री एम जे अकबर का नाम भी इसमें शामिल हो गया।

मतलब ये है कि ये कैंपेन अब सिर्फ हॉलीवुड औऱ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है और भारत की राजनीति में भी अपने पांव पसार रहा है। हो सकता है कुछ दिनों में कुछ और बड़े नेताओं के नाम भी सामने आए। अब सवाल ये उठता है कि इनमें कौन सच्चा है कौन झूठा? सवाल ये भी उठता है कि सारे सच बोल रहैं है या सारे झूठ? हो सकता है कि कोई बहती गंगा में हाथ धो रहा हो या ये भी हो सकता है कि पर्दे के पीछे की काली दुनिया आज सचमुच सबके सामने आ गई है?

एक बात जो डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा ने कही कि मीटू का मतलब स्त्री बनाम पुरुष नहीं है। जो यौन उत्पीड़न महिलाएं झेल रही हैं वो पुरुष भी झलते हैं। उनके साथ भी हैरेसमेंट होता है। इसका मतलब ये नही है कि वो सच्चे हैं। मतलब इसका ये भी नहीं है कि वो सिर्फ पुरुष हैं इसलिए वो गलत हों। सवाल यहां ये है कि किसी की कही बात पर बिना जांच पड़ताल किए हम उसे सच कैसे मान सकते हैं।

हम खुद से इस बात को कैसे साबित कर सकते हैं कि तनुश्री औऱ नाना में कौन सच बोल रहा है। जिनका नाम सामने आता गया वो भी चौंक गए। किसी किसी ने माफी मांग ली तो किसी ने जंग का एलान कर दिया। कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने ऐसा जवाब दिया की समझ नहीं आ रहा कि वो अपना गुनाह मान रहे हैं या सामने वाले को गुनहगार बता रहे हैं। सच्चाई जो भी हो, भली तभी होगी जब इस आंदोलन का परिणाम सामने आएगा। अगर ऐसा वास्तविक में हुआ है तो सजा मिले और अगर नहीं हुआ है तो महिलाओं को भी सबक मिले की किसी  पर भी झूठे आरोप नहीं लगा सकते। बस डर इस बात का है कि कहीं कोई और बड़ी खबर आते ही ये मुद्दा दब ना जाएं और बिना परिणाण के ही इसे धीरे धीरे भूला दें।

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