पीएम मोदी को ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड’, बोले “पर्यावरण के प्रति भारत सर्वाधिक संवेदनशील”

दिल्ली में एक विशेष सम्मान समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को चैंपिंयस ऑफ द अर्थ अवार्ड दिया गया है। पीएम को यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र की ओर से दिया गया। इस अवार्ड को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने दिया है। बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री को यह अवार्ड अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के नेतृत्व और 2022 तक भारत को एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक से मुक्त कराने के लिए दिया गया है।

पीएम मोदी के साथ 6 और लोगों को यह सम्मान- प्रधानमंत्री मोदी के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी ये खिताब दिया गया है। इनके साथ ही पांच अन्य व्यक्तियों और संगठनों को भी इस सम्मान से सम्मानित किया गया है। ये अवार्ड पूरी दुनिया में पर्यावरण के लिए किए गए कार्य पर  सराहना है।

क्यों किया गया है इस पुरस्कार से सम्मानित- संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक आज के समय के कुछ बेहद अत्यावश्यक पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने के लिए साहसी, नवोन्मेष और अथक प्रयास करने के लिए चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड का सम्मान दिया जा रहा है।

क्या कहा पीएम मोदी ने- पीएम मोदी ने कहा कि हमने प्रकृति को सजीव माना है। उन्होंने कहा कि जबतक क्लाइमेट की चिंता से कल्चर से नहीं होगी तब तक इस समस्या से पार पाना मुश्किल है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदनशीलता को आज पूरा विश्व स्वीकार रहा है। लेकिन ये हमारी वर्षों से जीवन शैली का ही एक हिस्सा रहा है।

उन्होंने प्रकृति को मां से तुलना करते हुए कहा कि भारत हमेशा प्रकृति को मां के रूप में देखता है। इसी के आगे पीएम मोदी कहते हैं कि ये सम्मान भारत के अादिवासीयों, किसानों और मछुआरों का सम्मान है। क्योंकि इन सभी का जीवनशैली प्रकृति के अनुसार ही चलता है। ये भारत की प्रत्येक नारी का सम्मान है जो पौधों का ख्याल रखती हैं।

उन्होंने गरीबी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हमारे देश में गरीबों की संख्या अब घट रही है। लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि बढ़ती आबादी को पर्यावरण पर प्रकृति पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना विकास के अवसरों से जोड़ने के लिए सहारे की आवश्यकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत उन देशों में शामिल है जहां सबसे तेज गति से शहरीकरण की प्रक्रिया हो रही है। लेकिन अपने शहरी जीवन को स्मार्ट और सतत विकास की ओर ले जाने पर भी बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसलिए मैं क्लाइमेट जस्टिस की बात करता हूँ। क्लाइमेट चेंज की चुनौती से क्लाइमेट जस्टिस किए बिना निपटा नहीं जा सकता है।