नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के इन 6 अवतारों के नामों का करें जाप, सभी संकटों का होगा नाश

वैसे देखा जाए तो नवरात्रि के दिनों में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्योहार बहुत ही पवित्र माना जाता है और इस त्यौहार को लोग अपनी सच्ची श्रद्धा से मनाते हैं नवरात्रि के 9 दिनों में सभी लोग माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं, दुर्गा सप्तशती के 11 वे अध्याय में देवताओं की स्तुति से प्रसन्न होकर मां भवानी ने यह वरदान दिया था कि जब जब त्रिलोक में संकट आएगा तब संकटों को दूर करने के लिए वह स्वयं अवतार लेंगीं भगवती माता भवानी ने भक्तों के संकटों को हरने के लिए विशेष रूप से 6 अवतार लिए थे, शास्त्रों के मुताबिक नवरात्रि के 9 दिनों तक इन अवतारों के केवल नामों का ही 108 बार जाप किया जाए तो भक्तों के सभी दुख माता रानी दूर करती है आज हम आपको इस लेख के माध्यम से माता दुर्गा के इन अवतारों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देने वाले हैं।

दुर्गा माता के इन अवतारों का जाप करें

रक्तदंतिका

देवताओं की रक्षा के लिए माता दुर्गा ने नंदगोप की पत्नी यशोदा के पेट से जन्म लिया था और विंध्याचल पर्वत पर निवास करने लगी थी दानव के नाश करने हेतु इन्होंने एक बहुत ही भयंकर रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया था इस अवतार में माता रानी ने अपने दांतो से राक्षसों को चबाया था जिसकी वजह से माता रानी के सारे दांत अनार के दानों की तरह लाल नजर आने लगे थे तभी से इस माता के अवतार को रक्तदंतिका के नाम से जाना जाता है।

शताक्षी

माता दुर्गा का अगला अवतार जब हुआ था जब 100 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई थी तब माता ने ऋषि मुनियों की स्तुति आवाहन और उनके पुकार से प्रकट हुई थी इस अवतार में माता ने अपने नेत्रों के द्वारा अपने भक्तों को देखा और इस संकट को दूर किया था तभी से इनका नाम शताक्षी माता हुआ।

शाकांबरी देवी

माता दुर्गा ने इस अवतार में 100 वर्षों तक बारिश नहीं होने पर इस धरती पर जीवन बचाने के लिए माता शाकांबरी देवी के रूप में आई थी और अपनी अनेकों शाखाओं से भरण पोषण करने लगी थी जब तक यहां पर वर्षा नहीं हुई थी।

दुर्गा

माता ने इस अवतार में एक दुर्गम नाम के राक्षस का संहार किया था और सभी भक्तों की रक्षा की थी तभी से माता का नाम दुर्गा पड़ा था।

भीमा देवी

जो राक्षस हिमालय में रहने वाले ऋषि मुनियों को परेशान करते थे उनका वध करने के लिए माता ने भीमा देवी के रूप में अवतार लिया था यह राक्षस ऋषि मुनियों की पूजा में विघ्न डालते थे तब माता ने ऋषि-मुनियों के संकट को दूर करने के लिए राक्षसों का वध किया था।

भ्रामरी माता

माता ने यह अवतार जब लिया था जब तीनों लोकों में अरुण नाम के राक्षस का अत्याचार बढ़ने लगा था और पूरा संसार त्राहिमाम होने लगा था ऋषि-मुनियों और देवताओं के आवाहन पर उनकी रक्षा हेतु माता ने छह पैरों वाले असंख्य भ्रमरो का रूप धारण करके अरुण राक्षस का नाश किया था तभी से माता दुर्गा भ्रामरी माता के नाम से पूजे जाने लगी थी।

नवरात्रों के दिनों में माता दुर्गा के इन रूपों के नाम या मंत्रों को श्रद्धा पूर्वक जाप करने से माता अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करती हैं।