सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला “आधार के बिना किसी को अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता”

आज सुप्रीम कोर्ट से कई अहम फैसले आ सकते हैं। इनमें आधार की वैधता, एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण, कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग जैसे विषय शामिल हैं। इसमें से ज्यादातर मामले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के बेंच पर है। जानकारी के लिए बता दें कि सीजेआई दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। देश के अगले चीफ जस्टिस, जस्टिस रंजन गोगोई होंगे।

आधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अआधार आदमी की पहचान है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। यह फैसला जस्टिस एके सीकरी ने अपने अलावा जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एम खानविलकर की ओर से ये फैसला पढ़ा।

जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार पर हमला करना आम आदमी के अधिकारों पर हमला करने जैसा है। उन्होंने ने कहा कि आधार आम आदमी का हथियार बना है। इसमें डुप्लीकेसी की संभावना नहीं है। जस्टिस सीकरी ने कहा कि शिक्षा हमें अंगूठे से हस्ताक्षर की ओर ले गई लेकिन तकनीक ने एक बार फिर हमें अंगूठे में ला दिया है। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि हर चीज बेस्ट हो। कुछ अलग भी होना चाहिए।

जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार बनाने के लिए जो भी डेटा लिया जा रहा है वो कम है। बल्कि इससे मिलने वाला फायदा बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 6 से 14 साल के बच्चों को स्कूलों में दाखिला लेने के लिए आधार की अनिवार्यता नहीं होगी। जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार के बिना किसी को उसके अधिकारों से रोका नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोबाइल नंबरों और बैंक खातों से आधार को जोड़ना संवैधानिक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने CBSE, NEET, UGC को भी कहा कि अगर वे आधार कार्ड को जरूरी नहीं कर सकते। सप्रीम कोर्ट ने आधार के मामले मेंं सरकार को कहा कि आधार को लेकर सरकार ने कोई तैयारी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि आधार एक्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे कि निजता पर सवाल खड़ा हो।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार आधार को मनी बिल की तरह पास नहीं कर सकती है।  चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एके सीकरी की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में सुनवाई की है।

जानकारी के लिए बता दें कि इस मसले पर कि आधार से किसी की निजता का उल्लंघन होता है या नहीं। इस पर 17 जनवरी से लगातार 38 दिनों तक सुनवाई चली थी।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में जब तक कोई फैसला नहीं आ जाता तब तक आधार लिंक का ऑप्शन खुला रहना चाहिए।