डेंगू के लक्षण और उपचार: समय रहते पीड़ित व्यक्ति की बच सकती है जान

डेंगू के लक्षण और उपचार: इन दिनों भारत मे डेंगू बुखार काफी फैल चुका है. देखा जाए तो यह एक किस्म का वायरल इन्फेक्शन है जो बुखार से शुरू होकर मृत्यु के द्वार तक भी पहुंच सकता है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन द्वारा की गई एक रेसर ह के अनुसार हर साल दुनिया मे 40 करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं जिनमे से अधिकतर संख्या अबच्चों की है. यदि डेंगू का बुखार अधिक गंभीर रूप ले लेता है तो दुर्भाग्यवश उसकी मृत्यु भी हो सकती है. हर साल 12,500 लोग इस बीमारी से लड़ते लड़ते अपनी जान से हाथ धो रहे हैं. आज हम आपको डेंगू के लक्षण और उपचार बताने जा रहे हैं, जिनका अगर समय रहते पता लगा कर पीड़ित को इलाज दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि डेंगू मच्छरों के काटने से फैलता है. यह मच्छर खास किस्म की प्रजाति के पाए जाते हैं. इन मच्छरों को “एडीज़ इज़ीप्ति” और “एडीज़ अल्बोपिक्ट्स” कहा जाता है. इन मच्छरों की पहचान आप इनके शरीर पर मौजूद चीते जैसी धारियों को देख कर सकते हैं. यह मच्छर दिन के समय काटते हैं. यह मच्छर खास तौर पर बरसात के मौसम में या फिर जुलाई से अगस्त महीने के बीच पाए जाते हैं. रिपोर्ट्स की माने तो इन मच्छरों की उड़ने की क्षमता बहुत कम होती है.

डेंगू के लक्षण और उपचार- ऐसे करें डेंगू के लक्षणों की पहचान

इन्क्यूबेशन पीरियड

यदि आपको कोई डेंगू मछार काट लेता है तो उसके लक्ष्ण दिखने में आपको 4 से 7 दिनों का वक़्त लगता है. इसलिए आप कम से कम तीन दिनों के अंदर या अधिक से अधिक दो सप्ताह तक इन लक्षणों को पहचान सकते है. बुखार डेंगू का सबसे पहला लक्ष्ण है. डेंगू का बुखार काफी तेज़ होता है इसलिए आप 4 से 7 दिन तक हर रोज़ अपना बुखार चेक करें. यदि आपको 102 °F से 105°F तक बुखार महसूस हो रहा है तो यह डेंगू की शुरुआत है. यह बुखार शुरुआती सप्ताह में तेज़ होता है और धीरे धीरे समान्य यां कम हो जाता है और फिर से तेज़ हो जाता है.

फ़्लू को पहचाने 

डेंगू बुखार शुरुआत में सामान्य फ्लू की तरह होता है लेकिन धीरे धीरे आपको आँखों के पीछे दर्द, लाल्ट में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, उल्टियाँ, जी मचलाना, थकान, त्वचा पर चकते आदि समस्याएं नजर आने लगती हैं. जोड़ों और मांसपेशियों में अत्याधिक दर्द होने के कारण डेंगू के बुखार को पहले “अस्थिभंजक ज्वर” भी कहा जाता था.

रक्त प्रवाह 

डेंगू बुखार में रक्त प्रवाह पर सबसे अधिक असर पड़ता है. ऐसे में यदि आपको नाक एवं मसूड़ों में खून आए या फिर आँखों के पास लालिमा, गले में सुजन नजर आए तो एक बार डेंगू टेस्ट जरुर करवा लें.

डेंगू के लक्ष्ण और उपचार- ऐसे दें मरीज़ को घरेलू इलाज

बकरी के दूध का सेवन

बकरी के दूध के कितने सारे फायदे हैं, ये तो लग्गभग आप सभी जानते ही होंगे. लेकिन आपको बता दें कि डेंगू पीड़ितों के लिए बकरी का दूध रामबाण साबित हो सकता है. दरअसल, बकरी के दूध में एक विशेष किस्म की गंध का अनुभव किया जा सकता है.देखा जाए तो बकरिया दिन भर औषधीय पौदों को खाती रहती हैं इसलिए उनेक दूध से जड़ी बूटियों की सुगंध आती रहती है. साथ ही इस दूध में विटामिन बी 6, बी 12 और विटामिन सी एवं डी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. वहीँ इसमें मौजूद फोलिक एसिड डेंगू के लिए लाभदायक साबित होता है. एक बात का ध्यान रखें कि इस दूध को एक साल से छोटे बच्चे को ना ही पिलाएं तो बेहतर होगा. क्यूंकि बकरी के दूध में गाय के दूध के मुकबले प्रोटीन जटिल नहीं होते इसलिए वह बच्चे के पेट में आसानी से पाच नहीं पाते.

गिलोय का जूस 

गिलोय का जूस डेंगू के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होता हा. इसके लिए आप गिलोय और 7 तुलसी के पत्ते ले लीजिए और इनका रस निकाल कर पी लें यदि आप इसकी कडवाहट कम करना चाहतें हैं इसको किसी अन्य जूस में मिक्स करके भी पी सकते हैं.

पपीते का सेवन 

पपीते की पत्तियों में कायमोपापिन और पापेन जैसे एंजाइम होते हैं जो प्लेटलेट्स काउंट को सामान्य बनाते हैं और डेंगू पेशेंट को रिकवरी करने में मदद करते हैं. इसके लिए सबसे पहले पपीते के पत्तों को साफ़ पानी से धो लें. लकड़ी की ओखली में पत्तों को बिना पानी, नामक एवं चीने के कूट लें. अब इन कुटी हुई पत्तियों का रस निकाल कर दिन में दो बार पीएं. इसकी पर्याप्त मात्र 10 मिलीलीटर होनी चाहिए और 5-12 वर्ष के बच्चों के लिए 2.5 मिलीलीटर रस से ज्यादा नही होना चाहिए.