नौकरी लगवाने के नाम पर ठगा लाखों युवाओं को, कृषि भवन में करवाते थे फ़र्ज़ी इंटरव्यू

नई दिल्ली: आजकल आए दिन ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें से कुछ मामले बहुत ही ज़्यादा हैरान करने वाले होते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) के सहायक इंजीनियर के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर युवाओं को ठगने वाले एक गिरोह को गिरफ़्तार किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ठगी करने वाले इस गिरोह में ग्रामीण विकास मंत्रालय के दो कर्मचारियों सहित कुल सात लोग शामिल हैं, जो काफ़ी समय से ठगी का काम कर रहे थे।

नौकरी लगवाने के नाम पर लेते थे 22 लाख रुपया:

पुलिस ने अनुसार, ठगी करने वाला यह गिरोह नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोज़गार युवाओं से 22 लाख रुपए लेता था। वहीं युवाओं का इंटरव्यू कृषि भवन स्थित ओएनजीसी के कार्यालय में करवाया जाता था। जिससे युवाओं को शक भी नहीं होता था। बता दें गिरफ़्तार किए गए आरोपियों में जगदीश राज, संदीप कुमार, किशोर कुणाल, वसीम, अंकित गुप्ता, विशाल गोयल और सुमन सौरभ है। इनमें से जगदीश राज और सुमन सौरभ ग्रामीण विकास मंत्रालय में मल्टी टास्किंग स्टाफ़ के तौर पर कार्यरत हैं। वहीं हैदराबाद निवासी एक आरोपी की अभी तलाश की जा रही है।

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि, इस ठगी करने वाले गिरोह के तार आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और बिहार से भी जुड़े हुए हैं। अपराध शाखा के एडिशनल कमिश्नर राजीव रंजन ने बताया कि ओएनजीसी में सहायक इंजीनियर के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर 22 लाख रुपए की ठगी के सम्बंध में वसंत कुंज नॉर्थ थाने में शिकायत दर्ज करवाई गयी थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए अपराध शाखा के डीसीपी भीष्म सिंह की टीम ने इसकी जाँच शुरू की। पुलिस ने ठगों को दबोचने के लिए आधुनिक सर्विलांस तकनीकी की मदद ली। पूर्व में आरोपियों के मोबाइल फ़ोन से की गई ओला कैब बुकिंग के आधार पर जाँच आगे बढ़ाई गई।

करता था ओएनजीसी में नौकरी पाने वाले युवाओं की खोज:

बताया जा रहा है कि इसी बीच पुलिस को एक आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए कम्प्यूटर का आइपी एड्रेस हाथ लग गया। इसके बाद पुलिस ने लक्ष्मी नगर से गिरोह के मास्टरमाइंड किशोर कुणाल और अन्य आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया। उसके पास से 27 मोबाइल फ़ोन, दो लैपटॉप, 10 चेकबुक, 45 सिम कार्ड सहित कई फ़र्ज़ी दस्तावेज़ भी बरामद हुए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि रवि चंद्रा नाम का व्यक्ति हैदराबाद में कन्सल्टेंसी फ़र्म चलाता है। वह वहीं से ओएनजीसी में नौकरी पानें वाले युवाओं की खोज करके दिल्ली में रहने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड किशोर कुणाल के पास भेज देता था।

कुणाल अभ्यर्थियों से यह कहता था कि उसका साला ओएनजीसी में काम करता है। वरिष्ठ अधिकारियों तक उसकी पहुँच बहुत अच्छी है। अभयर्थियों को अपने झाँसे में लेने के लिए आरोपी ओएनजीसी का फ़र्ज़ी ई-मेल बनाकर उनके पास ऑफ़र लेटर भेजते थे। इसके अलावा ठग कृषि भवन स्थित ओएनजीसी कार्यालय में अभ्यर्थियों का इंटरव्यू भी लेते थे। वहाँ पर जगदीश राज और संदीप कुमार अधिकारी के तौर पर मौजूद रहते थे। बाद में फ़र्ज़ी नियुक्ति पत्र भेजकर अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लेकर ठग उनसे सम्पर्क ख़त्म कर देते थे।