अगर आपके बच्चे भी खेलते हैं मोबाइल से तो हो सकती हैं उनमें ये 4 बड़ी समस्या, जानिए क्यों हानिकारक है

बच्चों में मोबाइल फोन की लत के खतरे पर काफी समय से बहस चल रही है। मनोरंजन उपलब्ध कराने से लेकर रास्ता बताने और अन्य सभी प्रकार के काम में आने वाला मोबाइल फोन आज हमारे जीवन में केंद्रीय भूमिका अदा कर रहा है। बेशक यह हर आयुवर्ग के लोगों के लिए एक जरूरी डिवाइस बन गया है। जेब में समा जाने वाले इस मोबाइल फोन में जानकारी का भंडार भरा है। लेकिन ठीक इसी के साथ ही यह हमारी मानसिक और शारीरिक स्थिति को भी बहुत हद तक प्रभावित कर रहा है। जाहिर है इंटरनेटऔर मोबाइल में सूचनाओं और जानकारियों का बड़ा संग्रह है। इन्हीं सूचनाओं और जानकारियों से जुड़े रहने की हमारी चाहत ने हमारे मानसिक स्थिति को उस स्तर तक पहुँचा दिया है जहां से इस खतरे को हल्के में बिल्कुल नहीं लिया जा सकता है। आधुनिकता ने हमें चारों तरफ से घेर रखा है मगर यह खतरनाक साबित हो रहा है।इसका असर शारीरिक के साथ साथ मानसिक विकास के स्तर पर भी हो रहा है।

स्मार्ट फोन के आने से आजकल बच्चे बहुतायत रूप में इसके शिकार हो रहे हैं। नई तकनीक ने जीवन जरूर आसान बना दिया है लेकिन ये बच्चों के लिए खतरनाक भी बन रहा है। बच्चों का बौद्धिक कौशल, सामाजिक चेतना और रचनात्मकता मोबाइल फोन के लत से प्रभावित हो रहा है। अगर आपका बच्चा भी मोबाइल फोन में अधिक समय बिताता है तो यह आपके बच्चे के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। तो आइये जानते हैं कि मोबाइल फोन के लत से बच्चों में कौन कौन से बुरे लक्षण देखने को मिलते हैं और उसके सुधारने के उपाय क्या क्या हैं।

  • बौद्धिक चेतना पर असर- मोबाइल फोन के ज्यादा प्रयोग से बच्चे अपने बुद्धि का कम प्रयोग करने लगते हैं, जबकि उनकी डिपेंडेंसी स्मार्ट फोन पर बढ़ जाती है। और स्मार्ट फोन उनके सोच के मुताबिक उन्हें सारी जानकारियां और सुविधाएं उपलब्ध करवाता है। अगर आपका बच्चा भी स्मार्टफोन या टेबलेट में अधिक समय बीताता है तो उसे ऐसा करने से रोकें, क्योंकि  यह उसके मानसिक विकास के लिए खतरनाकर साबित हो सकता है। घर में अगर बच्चे रोजाना 4-5 घंटे मोबाइल फोन पर गेम खेलने या अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं तो उन्हें घर के कुछ काम सौंपें। ताकि उन्हें जिम्मेदारी का एहसास होगा और वह अपने बुद्धि से कार्य करेंगे। और उनका बौद्धिक स्तर सुधरेगा।

  • सामाजिकता में कमी- बच्चे आजकल अक्सर अकेले में मोबाइल फोन पर अधिक समय बीताना पसंद करते हैं। इसी वजह से वो बाहरी व्यक्ति या घर परिवार के बड़े बुजुर्गों से कम मिलते हैं। परिणाम आता है कि वे समाज के कुछ मूल बातों को भी जानने से रह जाते हैं। एक अच्छा नागरिक बनने के लिए बच्चों का सामाजिक मेल मिलाप होना बहुत ही आवश्यक है। ये बात तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि मोबाइल फोन ने उन्हें अकेलेपन का भाव दिया है। अगर आपके बच्चे भी किसी से मिलना पसंद नहीं करते तो उन्हें मोबाइल से दूर रखें और अपना जुड़ाव उनसे बढ़ाएं और समाज के बारे में बताएँ। रोजाना आप उनके साथ कुछ रोचक खेल खेलें जिनसे वे मोबाइल फोन से दूर रहेंगे।
  • मानसिक विकास प्रभावित- अक्सर देखा गया है कि छोटे बच्चों के माता पिता गर्व महसूस करते हैं कि उनका बच्चा अपने आप ही मोबाइल में यूट्यूब या कैमरा चला लेता है। लेकिन वास्तविक में ये गर्व की बात नहीं है। बल्कि इसे एक समस्या के तौर पर भी देखा जा सकता है। अधिक समय तक मोबाइल चलाना आपके बच्चों के मानसिक विकास को रोक सकता है। बच्चे मोबाइल में कुछ गलत चीजों के शिकार हो जाएंगे तो यह खतरनाक स्थिति बन सकती है।

  • रचनात्मकता कौशल में गिरावट- ब्रिटेन के कुछ विशेषज्ञों ने बताया है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों पर मोबाइल फोन और टचस्क्रीन का बुरा असर पड़ रहा है। जिसकी वजह से स्कूल आने वाले बच्चों को पेन और पेंसिल पकड़ने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। शोध में पता चला है कि बच्चे पने पकड़ने के लिए परेशान हो रहे हैं। जबकि उनके चित्र बनाने और अन्य रचानात्मकता कौशल में लगातार गिरावट आ रही है। स्मार्टफोन के अधिक प्रयोग से बच्चों का खाना पीना और नींद भी प्रभावित हो रहा है।