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भीमा कोरेगांव हिंसा में आया नया मोड़, अलग अलग शहरों से हुई वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी

साल के शुरूआत में हुए भीमा कोरेगांव हिंसा में एक नया मोड़ आया है।  इस मामले में काफी समय बाद पुलिस की ओर से कार्रावाई की गई है। इस मामले की जांच कर रही पुणे पुलिस ने दिल्ली, हैदराबाद, रांची में एक साथ छापेमारी की और लंबे जांच के बाद पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है। पुणे पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि सभी 5 लोगों पर माओवादी संगठन के साथ लिंक होने का आरोप है।

रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक वरवरा राव, फरीदाबाद से मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज, दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख की भी गिरफ्तारी हुई है। पुणे से भी अरूण फरेरा और वेनोन गेंजालोव्स को भी गिरफ्तार किया है। गौतम नवलखा को घर में ही नजरबंद कर दिया गया है। वहीं वामपंथी विचारक वरवरा राव को गिरफ्तार किया गया है। पुणे पुलिस ने माओवादी संगठनों से लिंक का आरोप लगाते हुए पांच अलग अलग शहरों से गिरफ्तारी की है।

क्या था भीमा कोरेगांव हिंसा- भीमा कोरेगांव पुणे के बाहरी हिस्से में बसा एक गांव है। जहां महार समाज बहुसंख्यक में हैं। यहां इतिहास में महार समुदाय द्वारा ब्रिटिशों के साथ ब्राह्मण पेशवाओं के खिलाफ युद्ध लड़ा गया था। इसी युद्ध की 200वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी।

वहीं पुणे पुलिस का कहना है कि इस कार्यक्रम के कुछ दिन पहले मिलिंद एकबोटे (हिंदू एकता मंच) ने अपने समर्थकों के साथ इस योजना में बाधा डालने की योजना बनाई थी। जब तनाव के बाद हिंसा बढ़ गई तो पुलिस को संभाजी और एकबोटे को गिरफ्तार करना पड़ा। लेकिन उन्हें जमानत में छोड़ दिया गया।

इसी बीच पुणे पुलिस ने इस मामले में दलित और वामपंथ की ओर झुकाव रखने वाले कुछ कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया और इन पर आरोप लगाया गया कि भीमा कोरेगांव शौर्य दिन प्रेरणा दिवस अभियान द्वारा आयोजित एल्गार परिषद में भाग लिया था।

भीमा कोरेगांव शौर्य प्रेरणा अभियान 260 संगठनों का एक गठबंधन है। इसके द्वारा ही आयोजित एल्गार परिषद का आयोजन भी 1 जनवरी से कुछ दिन पहले ही हुआ था। इस कार्यक्रम में जिग्नेश मेवाणी, प्रकाश अंबेडकर( बाबा साहेब अंबेडकर के पोते) भी मौजूद थे।

इस मामले में पुणे पुलिस की ओर से जून में कथित तौर पर 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। जिन पर आरोप था कि इनके यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या वाले उल्लेख का पत्र मिला था। बरामद पत्र में कथित तौर पर प्रधानमंत्री की हत्या पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के तर्ज पर करने की बात कही गई थी।

आज हुए गिरफ्तारी में वरवरा राव पर ये आरोप है कि उन्होनें प्रधानमंंत्री मोदी के हत्या की साजिश रची थी। जबकि राव ने इस बात से इनकार करते हुए कहा है कि इस मामले में गिरफ्तार सभी लोग वंचितों की भलाई के लिए काम कर रहे थे।

माकपा ने क्या कहा- पुलिस की छापेमारी की निंदा करते हुए सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ सरकार की दमनकारी नीतियों का नतीजा बताया है। जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इसे सरकार की दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं।

 

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