सुबह भीगे हुए चने खाने के बाद तुरंत ना खाएं ये 2 चीजें, वरना शरीर पर हो सकता है जहर जैसा असर

अपनी सेहत को बनाने के लिए लोग अपना ख्याल रखते हैं. खान-पान से लेकर अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए लोग अपनी डाइट को सुबह से ही निर्धारित करने लगते हैं. बहुत से लोग हिमोग्लोबिन बढ़ाने और हाजमा दुरुस्त रखने के लिए रात में चना भिगो देते हैं और अगली सुबह वो भीगा हुआ चना खाते हैं. भीगा हुआ चना खाना बहुत अच्छी बात होती है, इससे आपके शरीर में खून की वृद्धि होती है और आप फिट भी रहते हैं लेकिन आप सुबह भीगे हुए चने खाने के बाद तुरंत ना खाएं ये 2 चीजें, क्योंकि ऐसा करने से आपको भयंकर रोग हो सकता है या पिर कभी-कभी ये जान लेने तक की नौबत लाकर खड़ा कर देता है और हम कुछ नहीं कर पाते.

सुबह भीगे हुए चने खाने के बाद तुरंत ना खाएं ये 2 चीजें

अक्सर लोग रोज सुबह जो खाली पेट भीगे हुए चने खाने लगते हैं और उसके तुरंत बाद नास्ता भी करते हैं. जिसमें वे कुछ भी खाएं लेकिन अगर ऐसी कौन सी दो चीजें नहीं खानी चाहिए जिससे उन्हें गंभीर बीमारी या फिर उससे भी ज्यादा खतरा हो सकता है, इस बारे में आपको जरूर जानना चाहिए. उन दो चीजों को हमें नहीं खाना चाहिए क्योंकि अगर भीगे हुए चने खाने के बाद ये दो चीजें खाएंगे तो वो आपके शरीर में जाकर जहर बना देगी जिससे आपको बहुत तरह की बीमारियां हो जाएगी और इन बीमारियों का जल्दी इलाज भी नहीं हो पाता है.

1. सुबह खाली पेट भीगे हुए चने खाने के बाद कभी भी हमें आचार का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि जैसा कि आप जानते हैं कि आचार को गलाने के लिए उसमें सिरका डाला जाता है और इसे चने के बाद खाना मतलब पेट में जहर बनने के बराबर होना तय है. भीगा हुआ चना और आचार का रिएक्शन एक साथ हो जाएगा और पेट में जहर बनने के साथ-साथ इससे हार्ट की बीमार भी हो सकती है और कई बार तो हार्ट अटैक भी आ जाता है. इसके अलावा सीने में भी लगातार जलन और दर्द बना रहता है.

2. सुबह के समय भीगे हुए चने खाने के बाद कभी भी आपको करेले का भी सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि भीगे हुए चने में जो ऑक्साइड पाया जाता है बिल्कुल वही करेले मे भी पाया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर ये होता है कि भीगे हुए चने में पाया जाने वाला ऑक्साइड लेवल बहुत कम होता है और करेले में पाया जाने वाला ऑक्साइड लेवल उससे ज्यादा होता है. इसकी वजह से यह हमारे शरीर में जा कर मिक्स होकर जहर बना देता है. इस जहर का रिएक्शन धीरे-धीरे होता है और गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है.

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