मरकर ज़िंदा हुआ यह व्यक्ति, अर्थी से उठकर कही ऐसी बात सुनकर दंग रह गए लोग

जीवन और मृत्यु किसी व्यक्ति के हाथ में नहीं है। जब जिसकी मौत आती है, उसे मरना ही होता है। लम्बा जीवन तो हर व्यक्ति जिन चाहता है लेकिन सबको लम्बा जीवन नहीं मिल पाता है। कुछ लोगों को काम उम्र में ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। हिंदू धर्म के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मारने का काम यमराज का होता है। यमदेव को मौत का देवता कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद यमराज अपने दूतों को व्यक्ति को लाने के लिए भेजते हैं। लेकिन कई बार ये यमदूत ग़लती भी कर देते हैं।

हाल ही में यमदूतों की ग़लती का एक नमूना देखने को मिला है। आप तो जानते ही हैं कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु उसके परिवार के लिए कितनी दुखदायी होती है। ख़ुशियाँ कब ग़म में बदल जाती हैं, कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन हैरानी तब होती है जब लोगों का मातम अचानक ख़ुशियों में बदल जाता है। ऐसा ही हुआ अलीगढ़ के गाँव किरथल में। यहाँ एक व्यक्ति मरने के 5 घंटे बाद फिर से ज़िंदा हो गया। इस नज़ारे को देखकर अंतिम संस्कार के लिए जुटे लोग हैरान हो गए।

गाँववालो को इस बात पर यक़ीन नहीं हो रहा था कि कोई मारकर ज़िंदा कैसे हो सकता है, लेकिन जब जीवित हुए व्यक्ति ने सबका नाम पुकारना शुरू किया तो लोगों को उसके ज़िंदा होने का भरोसा हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 53 साल के रामकिशोर का अचानक निधन हो गया। रामकिशोर मरने से पहले बिलकुल स्वस्थ्य थे, अचानक ही उनकी मौत हो गयी। रामकिशोर के मरने के बाद परिवार में हड़कम्प मच गया। रिस्तेदार जुटने लगे और गाँववालों ने अंतिम संस्कार की तैयारियाँ भी शुरू कर दी। लेकिन उस समय वहाँ कोहराम मच गया जब रामकोशिर के शरीर में हरकत होने लगी।

अचानक रामकिशोर उठकर बैठ गया। इस घटना के बाद जब रामकिशोर से पूछा गया कि उसने क्या देखा तो उसने बताया कि उसे इसके बारे में ज़्यादा कुछ याद नहीं है। उसे बस केवल यही दिखा कि वह एक बैठक का हिस्सा है। बैठक में कुछ दाढ़ी वाले महात्मा सबसे बड़ी दाढ़ी वाले महात्मा को अपना-अपना पक्ष बता रहे थे। उसी दौरान बड़े महात्मा ने कहा कि इसे ले चलो। कुछ देर बाद एक और आवाज़ आइ कि इसे इतनी जल्दी क्यों ले आए। अभी इसमें वक़्त है।

उन्होंने बताया कि ग़लती से उसे यमदूत ले गए थे, अब उसे वापस भेज दिया है। इतना सुनने के बाद ही उन्हें लगा कि किसी ने उन्हें बहुत ज़ोर का धक्का दे दिया और जब आँख खुली तो उन्होंने देखा कि परिवार के लोग उनके आस-पास बैठकर बिलख रहे हैं। इस घटना के बारे में IMA के अध्यक्ष डॉक्टर संजय मित्तल ने बताया कि इस तरह की घटनाओं को हम नहीं मानते हैं। विज्ञान हमें इसे स्वीकार करने की इजाज़त नहीं देता है। आए दिन ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति की मौत किस परिस्थिति में हुई और उसकी मौत को किसने सही ठहराया है।

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