चीफ जस्टिस पर महाभियोग शुरू भी हुआ तो भी विपक्ष की हार पक्की

चीफ जस्टिस को लेकर महाभियोग की तैयारी करने से पहले ही विपक्ष की हार तय मानी जा रही है। जी  हां,  विपक्ष के पास सदन में इतने सांसद भी नहीं है, जोकि इस मुद्दे को लेकर सहमति बना पाए। पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी के पास पर्याप्त मात्रा में सांसद है, ऐसे में बीजेपी को इसको रोकने की कोई साजिश नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि यह प्रस्ताव अपने आप ही खत्म हो जाएगा। बता  दें कि इसके पीछे कई ऐसे तथ्य है, जिन्हें आपको जानना जरूरी है। तो चलिए हम आपको इसके तथ्यों से रूबरू कराते हैं। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

जी हां, विपक्ष इस प्रस्ताव को संसद में देकर भले ही खुश हो रहा हो, लेकिन उसे भी  पता है कि संसद में उसकी हार पूरी तरह से तय है। हालांकि, इस मसले को लेकर तरह तरह के सियासी बयान भी देखने को मिल रहे हैं, लेकिन विपक्ष में भी फूट के स्वर सुनाई देने लगे हैं। कांग्रेस पार्टी  का साथ देने वाली पार्टियां भी अब कांग्रेस से इस मुद्दे पर सबूत मांग रही है, ऐसे में अब कांग्रेस के पास समर्थन कम होने लगा है, ऐसे में यह जरूरी है कि सदन में उसके पास समर्थन हो, जोकि आकड़ोंं को देखे तो बिल्कुल भी समर्थन नहीं दिखाई दे रहा है।

बता दें कि प्रस्ताव पर मुहर लगाने के लिए राज्यसभा में 70 सांसद चाहिए, तो वहीं लोकसभा में 100 से अधिक. ऐसे हालात में अगर राज्यसभा से यह पास हो भी जाता है तो लोकसभा में यह पूरी तरह से गिर जाएगा, क्योंकि लोकसभा में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है, ऐसे में बीजेपी इस प्रस्ताव को रोक लेगी। मतलब साफ कहे तो यह प्रस्ताव अगर सदन में आ भी गया  तो इसको लेकर कोई चर्चा नहीं होगी, क्योंकि यह चर्चा से पहले ही लुढ़क जाएगा।

गौरतलब है  कि कांग्रेस समेत 7 पार्टियों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रस्ताव जरूर रखा है, लेकिन 7 पार्टियों को भी मिलाकर भी पर्याप्त बहुमत पार्टी इस पर नहीं जुटा पाई है। याद दिला दें कि पहले भी महाभियोग प्रस्ताव लाया जा चुका है, लेकिन उससे किसी भी जज को अपनी कुर्सी नहीं खोनी पड़ी थी, तो यहां तो विपक्ष के पास सदन में ही बहुमत नहीं है, तो ऐसे में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को इससे कोई खतरा नहीं है। हालांकि, इस कदम से वो काफी आहत जरूर हुए हैं, पर उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं होने वाला है, क्योंकि कांग्रेस के सामने चुनौतियों का विशाल है।

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