मायावती के चेहरे से उतरा दलितों के मसीहा होने का नकाब, जरूर पढ़िये

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद देशभर में दलितों ने जबरदस्त हंगामा किया तो वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर सियासत शुरू हो गई। जी हां, खुद को दलितों का मसीहा कहने वाली मायावती का ऐसा चेहरा शायद ही अब आपको याद होगा। 2007 में जब वो यूपी की मुख्यमंत्री थी, तब उन्होंने एक ऐसा फैसला किया था, जिससे आज उनके चेहरे पर लगा मुखौटा उतर जाएगा। बताते चलें कि बात 2007 की है, जब उत्तर प्रदेश में मायावती का राज था, ऐसे में उस समय दलितों को लेकर मायावती ने एक बड़ा आदेश दिया था, जिससे जानकर आप भी मायावती के सच से वाकिफ हो पाएंगे। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

जी हां, एससी एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाई तो देशभर में दलितों नें प्रदर्शन किया। यहां हैरान दलितों के प्रदर्शन को लेकर नहीं है। बल्कि हैरानी इस बात की है कि आज जो केंद्र सरकार पर दलितों को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं, कभी उनके इतिहास में जाकर देखो तो पता चल जाएगा कि कौन दलितों का मसीहा है। बताते चलें कि दलित आंदोलन से पहले ही मायावती केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाती हुई नजर आई।

मायावती ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार दलित विरोधी है, जानबूझकर कोर्ट में दलितों के पक्ष को मजबूती से नहीं रखा है, ऐसे में प्रदर्शन के चंद दिनों बाद ही  मायावती का एक आर्डर तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने एससी एसटी एक्ट के तहत होने वाली गिरफ्तारी पर रोक लगाया था। जी हां, मायावती ने आदेश दिया था कि इस एक्ट का दुरूपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी, इसके साथ ही तुरंत गिरफ्तारी भी नहीं होगी। इतना ही नहीं, आज भी यूपी में दलितों को लेकर अलग कानून ही चलता है, तो फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मायावती को ऐतराज क्यों है?

गजब की बात तो यह है कि मायावती का यह संशोधन आज भी उत्तर प्रदेश में लागू है, जिसके तहत इस तरह के मामले में तुरंत गिरफ्तारी नहीं बल्कि जांच होती है। जी हां, यूपी में इस एक्ट के तहत अगर किसी को फंसाया जाता है, तो फंसाने वाले पर कार्रवाई की जाती है, तो सवाल ये खड़ा होता है कि अगर ये यूपी में लागू है, तो पूरे देश में लागू क्यों नहीं हो सकता है, क्यों राजनीतिक दल इसे लेकर सियासी दांव खेलते हुए नजर आ रहे है?

बता दें कि एससी एसटी एक्ट को लेकर अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष इसे लेकर अपनी पूरी बात 10 दिनों के अंदर कोर्ट में रखे। इसके साथ ही इस मामले में अगली सुनवाई दस दिनों के बाद होगी, तब जाकर ये तय होगा कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर अडिग रहेगा या फिर यू-टर्न लेगा, ये तो खैर वक्त ही बताएगा।