राजनीति

SC/ST आंदोलन: दंगाइयों के सामने बेबस दिखी पुलिस, कहीं फूंकी बसें तो कहीं ली मासूमों की जान

आंदोलन कैसा भी क्यों न हो, हर बार इसकी आंच हिंसा तक जरूर पहुंच जाती है। फिर अगर मांग आरक्षण और अधिकार की हो तो पूछो ही मत। जी हां, अधिकार के नाम पर सोमवार को देश के कोने कोने प्रदर्शनकारियों ने अपना विकराल रूप दिखाया, जिससे सरकार और पुलिस पूरी तरह से सहम गई। बता दें कि पूरे देश में प्रदर्शनकारियों ने हक के नाम पर जो तांडव मचाया, वो शायद ही कोई भूला सकेगा। इस हक की लड़ाई में कई लोगों की जान गई तो कई लोग बुरी तरह से घायल हो गये, लेकिन हिंसा करने वालों का दिल नहीं पसीजा। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी एक्ट में बदलाव करने के विऱोध में सोमवार को व्यापक रूप से हिंसा देखने को मिला। जगह जगह बस, ट्रेन आदि पर हमला  किया गया, जोकि यही दर्शाता है कि लोग अपने हक के लिए दूसरों की जिंदगियां लेने में जरा भी नहीं हिचकते हैं। हम बार बार भूल जाते हैं कि हम बापू के देश में रहते हैं, जोकि अंहिसा के पुजारी है, लेकिन हम आंदोलन के नाम पर जिस तरह से हिंसा करते हैं, वो देश को पूरी तरह से शर्मसार कर देता है। ऐसे में सोमवार को हुई हिंसा में जहां एक तरफ तोड़फोड़ हुई तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी घटनाएं भी हुई, जिसे जानकर दिल सहम सा गया।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाई तो दलितों ने इसे अपने खिलाफ मानते हुए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। दलितों के प्रदर्शन से सरकार पूरी तरह से अस्त व्यस्त दिखी। आलम यह हुआ कि वोट बैकिंग के लिए जहां एक तरफ सरकार आनन फानन में सुप्रीम कोर्ट पहुंची तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ आजमाती हुई  दिख रही है। हालांकि,केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत कार्रवाई करने से इंकार कर दिया, ऐसे में सरकार मंगलवार को एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में मामले में त्वरित कार्रवाई करने की अपील करेगी।

क्या बस क्या ट्रेन, क्या लोगों की जिंदगी, हर चीज से दंगाईयों ने किया खिलवाड़

बड़े संख्या में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने जमकर हड़कंप मचाया। जी हां, देश भर से हिंसा की खबरों ने इस आंदोलन को दंगा का रूप करार दिया, क्योंकि आंदोलन शांति से होता है और जिसमें हिंसा हो, उसे दंगा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा। यूपी से लेकर एमपी समेत देश के 14 राज्यों में जमकर हिंसा हुई।

हिंसा में 11 लोगों की मौत भी हो चुकी है, जिसमें से एमपी में ही 7 लोगों की मौत हुई है, तो वहीं यूपी, बिहार, पंजाब और राजस्थान में एक एक मौत की खबरे सामने आ रही है, जोकि आंदोलन के नाम पर धब्बा लगाने का काम कर रही है। हालांकि, देखना ये होगा कि सरकार इस पर क्या एक्शन लेती है। बताते चलें कि हिंसा के दौरान सरकार बार बार शांति की अपील करती हुई नजर आई, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई।

दलितों ने अधिकारों के लिए भले ही ये आंदोलन किया हो, लेकिन इस आंदोलन ने कितने लोगों की जिंदगियां खराब कर दी है। जी हां, इस आंदोलन में किसी ने अपना भाई खोया, तो किसी ने अपना सुहाग तो किसी ने अपने बेटा खोया है, लेकिन दंगा करने वालों को क्या फर्क पड़ता है, क्योंकि उन्हें सिर्फ अधिकार चाहिए, उसके लिए वो चाहे न जाने कितने मासूमों को खून क्यों न बहा दें। अपने अधिकारों के लिए लड़ना बिल्कुल सही है, लेकिन अधिकार के नाम पर दंगा करना ये सरासर गलत है।

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