पूरी दुनिया का सबसे खतरनाक बॉर्डर, जहाँ जानें वाले खुद लेते हैं अपनी मौत की जिम्मेदारी

पनमुनजोम बॉर्डर: दुनिया बहुत बड़ी है और इस दुनिया में सैकड़ों देश हैं। हर देश की अपनी कुछ खासियत है। दुनिया में जितने भी देश हैं, इनमे से कई ऐसे देश हैं, जिनके बारे में लोग जानते भी हैं। कई देश आपस में सटे हुए हैं और कईयों का हाल ही में बंटवारा भी हुआ है। ऐसे में एक देश को दुसरे देश से अलग करने के लिए दो देशों के बीच में सीमाएं बनायी जाती हैं। कई देशों की सीमाएं इतनी ज्यादा खतरनाक हैं, जहाँ जानें के बारे में सोचकर भी डर लगता है। आज हम आपको एक ऐसे ही देश की सीमा के बारे में बताने जा रहे हैं।

दिखाई दे रहा है दोनों देशों के संबंधों पर असर:

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का नाम तो आपने सुना ही होगा। उत्तर कोरिया के बारे में कहा जाता है कि वहां पर किम जोंग नाम के एक सनकी तानाशाह का राज चलता है। वह अपने देश में ऐसे-ऐसे काम करता है, जिसके बारे में कोई सपने में भी नहीं सोच सकता है। हाल ही में उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग चीन के दौरे पर आया है। ऐसे में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के नजदीक होते संबंधों पर असर होता दिखाई दे रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें किसी समय में ये दोनों देश एक ही हुआ करते थे लेकिन आज दोनों एक दुसरे के कट्टर दुश्मन हैं।

डिमिलिट्राईज पट्टी पर तैनात रहते हैं सबसे ज्यादा सैनिक:

इन रिश्तों का असर इन दोनों देशों को बाँटने वाली 250 किमी लम्बी सीमा रेखा पर भी देखने को मिलता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें इसे दुनिया का सबसे खतरनाक बॉर्डर कहा जाता है। इस सीमा के दोनों तरफ डिमिलिट्राईज जों हैं जहाँ जाने वाले टूरिस्टों से पहले ही लिखित में ले लिया जाता है कि वह खुद अपने मौत के जिम्मेदार हैं। आपको बता दें इस जगह को पनमुनजोम बॉर्डर के नाम से जाना जाता है, यह दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल से 55 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ पर दोनों देशों के बीच चार किलोमीटर की डिमिलिट्राईज पट्टी है जहाँ पर सबसे ज्यादा हथियारबंद सैनिक तैनात हैं।

1953 में पनमुंजोम गाँव में ही हुआ था दोनों देशों के बीच समझौता:

यहाँ हर जगह लैंड माइन, कंटीले तार और टैंक रोकने के लिए स्टॉप लाइन बिछायी गयी है। यह पूरी दुनिया का ऐसा अकेला टूरिस्ट प्लेस है जहाँ जाने से पहले ही यात्रियों से पेपर पर साइन करवा लिया जाता है। उनसे पेपर पर पहले ही लिखवा लिया जाता है कि यहाँ जानें के बाद अगर वह चोटिल होते हैं या उनकी मौत हो जाती है तो उसके लिए कोई और नहीं बल्कि वह खुद जिम्मेदार हैं। आपको बता दें पनमुंजोम एक छोटा सा गाँव है। यहीं पर दोनों देशों के बीच वॉर को ख़त्म करने के लिए 1953 में समझौता हुआ था।

आखिरी फ्रंटियर को देखने हर साल आते हैं हजारो सैलानी:

यहाँ हुए समझौते से दोनों देश कभी खुश नज़र नहीं आये। यहाँ लगभग 5 दशक बीत जानें के बाद भी युद्ध के हालात बने हुए हैं। इस जगह पर दोनों देशों के सैनिक बड़ी संख्या में तैनात रहते हैं। आपको बता दें कोल्ड वॉर के आखिरी फ्रंटियर को देखने के लिए यहाँ पर हर साल हजारों की संख्या में टूरिस्ट पहुँचते हैं। सियोल से पनमुंजोम तक का सफ़र बहुत ही मनोरम है। इस जगह का सबसे खास स्थान एक नीले रंग की बिल्डिंग है जहाँ समय-समय पर दोनों देशों के अधिकारी मुलाकात करते हैं। यहाँ आने वाले यात्रियों को पहले ही आगाह कर दिया जाता है कि वह उत्तर कोरिया के सैनिकों से ना ही आँख मिलाएं और ना ही किसी तरह की बात करें।