मणिकर्णिका घाट: यहां जलती चिताओं के बीच क्यों नाचती हैं वेश्याएं? जानकर आप भी हो जाएंगे दंग

मणिकर्णिका घाट का इतिहास : जब हम जीवन के लंबे सफर के बाद किसी को चिता पर लेटा हुआ देखते हैं तो हमारे मन में यही ख्याल आता है कि क्यों यही हमारे जीवन का सच है। क्या एक दिन हम भी इसी तरह लेटे होंगे। जीवन तमाम परेशानियों और उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है। लेकिन, इन सभी परेशानियों का अंत मौत के बाद हो जाता है। यह एक कड़वी सच्चाई है कि जीवन के बाद मृत्यु निश्चित है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर हम किसी शव को चिता में जलते हुए देखते हैं तो हमारा मोह भी जीवन के प्रति खत्म हो जाता है। आज हम आपको वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का इतिहास बताएंगे जहां पूरे साल में एक शाम को बाजे-गाजे के साथ वेश्‍याओं की महफिल लगती है।

ये है वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का इतिहास

हम बात कर रहे हैं वाराणसी के मशहूर श्मशान घाट (मणिकर्णिका) की। यहां साल में एक दिन वेश्याओं की महफिल लगती है और वो सभी जलती चिताओं के बीच नृत्य करती है। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं यहां नृत्य करती हैं उन्हें अगले जन्म में बेहतर जिंदगी मिलती है। यही वजह है कि हर साल चैत्र नवरात्र में दूर-दूर से देहव्यापार से जुड़ी महिलाएं यहां आकर नृत्य करती हैं। हर साल कि तरह इस साल भी नगरवधुओं की महफिल सजी।

ये नगरवधुएं पूरी रात जलती चिताओं के बीच नृत्‍य करती हैं ताकि अगले जन्‍म में उन्‍हें किसी अच्छे परिवार में जन्म मिल सके। वो नृत्य कर अलगे जन्म में शरीर ना बेचना पड़े इसकी दुआ मांगती हैं। आपको बता दें कि यहां कई सालों से ये परंपरा चली आ रही है। सदियों से चली आ रही ये परंपरा आज भी समाज की नजरों से छिपी हुई है। गौरतलब है कि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हर चैत्र नवरात्र में दूर-दूर से देहव्यापार से जुड़ी महिलाएं यहां आकर नृत्य करती हैं।

मोक्ष की प्राप्ति के लिए रात भर करती हैं साधना

यहां वाराणसी के अलावा चंदौली, मिर्जापुर और मुंबई समेत कई शहरों से वेश्याएं आकर अपनी साधना करती हैं। आपको बता दें कि 16वीं शताब्दी में राजा मान सिंह ने यहां पर मशान नाथ मंदिर बनवाया था। लेकिन, पास में ही श्मशान होने की वजह से कोई भी यहां पूजा आदि करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद राजा ने नगरवधुओं को इस मंदिर में आकर भजन किर्तन करने का न्यौता दिया। इसके बाद वो पूरी रात इस मंदिर में नृत्य करते हुए अगले जन्‍म में बेहतर जिंदगी मिलने की दुआ करती रही।

आपको बता दें कि काशी यानि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की महिमा कुछ ऐसी है कि यहां पहुंचकर हर व्यक्ति को अपने जीवन की असलियत पता चल जाती है। जब यहां शाम को बैठकर कोई जलते शव को देखता है तो उसे सारे दुख और सुख झलावे लगते हैं। मणिकर्णिका घाट के विषय में कहा जाता है कि यहां जलाया गये व्यक्ति को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसीलिए, यहां हर रोज़ हज़ारों लाशे जलाई जाती है। आपको बता दें कि सदियों से वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर जल रही चिता की आग आज तक कभी बुझी नहीं है। यहां सदियों से 24 घंटो कोई न कोई लाश जलती ही रहती है।

तो ये था ये है वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का इतिहास