अध्यात्म

कामाख्या मंदिर है बेहद रहस्मयी, इसका सच जानकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे!

कामाख्या मंदिर के रहस्य ( kamakhya mandir ) : इस दुनिया में कईं हजारों जगहें ऐसी हैं, जिनके अंदर कोई ना कोई गहरा राज़ छिपा हुआ है. सदियों से लोग ऐसी जगहों को भूतिया जगह मानते आएं हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इन रहस्यमयी जगहों पर ज्यादतर लोग जाने से कन्नी कतराते हैं. इसके पीछे की वजह उनका डर होता है. डरावने और रहस्मयी किलों या घरों के बारे में तो आपने सुना ही होगा. मगर क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान कोई मंदिर भी रहस्मयी हो सकता है? अगर नहीं तो दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने आप में ही बेहद मायावी और रहस्मयी है. ये मंदिर दरअसल भारत में ही मौजूद है.

इस मंदिर को लोग कामाख्या मंदिर के नाम से जानते हैं. यह मंदिर गुवहाटी से 8 किमी दूर कामागिरी या नीलाचल पर्वत पर स्थित है. कहते हैं कि इस मंदिर में कईं आलोकिक शक्तियां और राज़ दफ़न हैं.

मंदिर का अम्बुबासी मेला ( kamakhya mandir )

कामाख्या मंदिर ( kamakhya mandir ) को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां सती देवी का योनि भाग गिरा था जिसके कारण बरसों से यह मंदिर सती की योनि का प्रतिनिधित्व करता आ रहा है. सती देवी के बारे में तो आप सभी जानते हैं. सती ने भगवान शिव से क्रोधित होकर विनाश का नृत्य यानि तांडव किया था. साथ ही सती ने भगवान शिव को पूरी धरा को नष्ट करने की चेतावनी दी थी. जिसके बाद भगवान महा विष्णु ने क्रोध में आकर सती देवी के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए. यह टुकड़े पृथ्वी के कई अलग-अलग हिस्सों में जा गिरे. इन्हीं में से सती का योनि भाग सामग्री नामक जगह में जा गिरा. यही वह स्थान है जहां सती देवी भगवान शिव के साथ अक्सर आया करती थी.

कामाख्या माता (  kamakhya maata )

हिंदू धर्म के लोग कामाख्या देवी की पूजा भगवान शिव के नववधू रूप में करती है. ऐसा माना जाता है कि कामाख्या देवी की पूजा करने से इंसान को मुक्ति प्राप्त होती है साथ ही सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. तांत्रिकों के लिए काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या सबसे महत्वपूर्ण देवी है.

यह है कामाख्या पूजा का उद्देश्य

इस मंदिर के गर्भ गृह में किसी प्रकार की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं की गई बल्कि यह मंदिर समतल चट्टान के बीच बनी विभाजन देवी की योनि को दर्शाता है. पास में ही एक झरना मौजूद होने के कारण यह चट्टान अक्सर गिरी रहती है जिसके कारण इस मंदिर को काफी प्रभाव कारी एवं शक्तिशाली माना जाता है. कुछ लोगों के अनुसार इस जल को पीने से हर प्रकार की बीमारी नष्ट हो जाती है.

रजस्वला देवी कामाख्या

हमारे भारत देश में औरतों के मासिक धर्म को अशुद्ध माना जाता है इसलिए इस समय लड़के को अशुभ समझकर ठुकरा दिया जाता है परंतु कामाख्या मंदिर के मामले में ऐसा नहीं है. हर साल कामाख्या में अम्बुबाची का मेला लगता है जिसके दौरान यहां का पानी 3 दिन के लिए लाल पड़ जाता है. लोगों के अनुसार यह लाल पानी कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है. जिसके 3 दिन बाद ही वहां लाखों श्रद्धालु पहुंच जाते हैं और मासिक धर्म से गीले हुए वस्त्रों को प्रसाद स्वरूप लेने के लिए पहुंच जाते हैं.

जनन क्षमता का पर्व

अम्बुबासी मेला को अम्बुबाची नाम से भी जाना जाता है. इसको अमेठी और तांत्रिक जन्म क्षमता का पर्व मनाया समझ कर मनाया जाता है. अम्बुबासी शब्द अंबु और बाती दो शब्दों के मेल से बना है जिसमें अंबु का अर्थ है पानी जबकि बाची का अर्थ है उतफूलन. शायद इसीलिए यह स्त्रियों की शक्ति और उनकी जन्म क्षमता को दर्शाता है. यह मेला हर साल यहां मनाया जाता है जिसको महाकुंभ भी कहा जाता है.

शक्तियों का होता है प्रदर्शन

कामाख्या मंदिर के अम्बुबासी मेले के दौरान तांत्रिक शक्तियों को काफी महत्व दिया जाता है. यहां सैकड़ों तांत्रिक अपने एकांतवास से बाहर आते हैं और अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं. यह तांत्रिक मेले के दौरान लोगों को वरदान देने के साथ-साथ उनकी सहायता भी करते हैं. ऐसा माना जाता है कि कोई भी व्यक्ति जब तक पूरन तांत्रिक नहीं बन जाता तब तक वह कामाख्या देवी के सामने माथा ना टेके वरना इससे देवी नराज़ हो सकती है.

पशुओं की दी जाती है बलि – कामाख्या मंदिर

हालांकि पशुओं की बलि देना देश में वर्जित है परंतु यहां बकरे और भैंस की बलि देना आम बात है. पशुओं की बलि देकर और भंडारा करने के बाद ही कामाख्या देवी प्रसन्न होती हैं. इस मंदिर में जाने से हर प्रकार के काले जादू और श्राप से छुटकारा मिल जाता है.

Related Articles

Close