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38 साल तक बिना खाना खाए जिंदा रहा ये व्यक्ति, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

कोई भी जीव बिना भोजन किए कितने दिन रह सकता है। एक दिन, दो दिन, एक सप्ताह, एक महीने या एक साल। आप कहेंगे, एकदिन भी मुश्किल है। एक हफ्ते अनशन किया जा सकता है, चालिस दिन तक भगत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ अनशन किया था। लेकिन आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसने सालों साल भोजन का एक निवाला तक नहीं खाया। जी हां कहानी इतनी दर्दनाक है कि आपके भी आंसू निकल आएंगे। क्योंकि इस व्यक्ति ने पूरे 38 साल तक अन्न का एक दाना नहीं खाया।

दरअसल ये दर्दनाक कहानी पुणे में रहने वाले राजेंद्र पंचाल की है। जो एक साल की उम्र में ऐसे भयंकर हादसे का शिकार हो गए कि जान तो बच गई, लेकिन मौत से बदतर जिंदगी तीन दशक तक काट ली। राजेंद्र पंचाल की हादसे में ऐसी हालत हो गई की, मुंह नहीं खुलना बंद हो गया। आलम ये हो गया कि एक दिन उनका मुंह खुलना पूरी तरह बंद हो गया। हादसे के बाद से ही पंचाल सिर्फ़ बोल पाने की स्थित में थे और मुंह केवल 1.5 सेमी तक मुंह खोल पाते थे।

एक साल की उम्र में हुआ था हादसा

ऐसे में उनको लगातार जिंदा रहने के लिए बिना भोजन किए 38 सालों तक सिर्फ़ तरल पदार्थों पर जिंदा रहना पड़ा। धीरे धीरे राजेंद्र पंचाल के ज़िंदगी के 38 बरस बीत गए। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि किसी अच्छे और बड़े डॉक्टर से इलाज करा सके।

डॉक्टर साबित हुए भगवान

राजेंद्र पंचाल का संघर्ष उस वक्त और बढ़ गया जब बीते कुछ महीनों से उनके दातों में दर्द बढ़ गया। आलम ये था कि दांतों को कई डॉक्टरों को दिखाया। लेकिन मुश्किल ये थी कि डॉक्टर उनके दर्द को दूर करने के लिए समस्या तक पहुंच नहीं पा रहे थे। मुंह इतना नहीं खुल रहा था कि वो दांत को देख पाएं। एमए रंगूनवाला कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस के डॉक्टर्स से संपर्क किया। जिसके बाद दांतों के ज्वाइंट को निकालने का फैसला किया। जिसके बाद डॉक्टरों ने आपरेशन की तैयारी शुरु की।

अस्पताल ने दिखाई दरियादिली

आर्थिक रूप से बेहद कमजोर राजेंद्र पंचाल का इलाज करने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों ने अस्पताल के प्रबंधन से बात की। जिसके बाद मैनेजमेंट के सदस्यों ने फ्री इलाज की अनुमति दे दी। जिसके बाद उनकी सर्जरी की गई। हॉस्पिटल के डॉक्टर अरुण तांबूवाला ने कहा, ‘पंचाल की आर्थिक स्थिति को लेकर हमने मैनेजमेंट से चर्चा की, जिसके बाद हमें फ़्री सर्जरी की अनुमति मिल गई।’

पहली बार खाया खाना

इसके बाद डॉक्टरों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, पंचाल का ऑपरेशन किया। जिसके बाद पंचाल का मुंह 4 सेमी तक खोलने के लायक हो गया। डॉक्टरों के इस प्रयास के बाद राजेंद्र पंचाल ने सभी को धन्यवाद किया और कहा कि  जन्म के बाद पहली बार ठोस पदार्थ का सेवन भी किया। 38 साल से भूख से तड़पते इंसान को खाना मिलना चमत्कार से कम नहीं है। पंचाल ने बताया कि डॉक्टरों ने उसे नई जिंदगी दी है।

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