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ऐसे किया जाता है किन्नरों का अंतिम संस्कार, पार्थिव शरीर को जूते एवं चप्पलों से पीटा जाता है

किन्नरों का अंतिम संस्कार: कहते हैं मौत पर किसी का कोई बस नहीं चलता. ये कभी भी किसी के प्राण हर सकती है. इंसान हो या कोई पशु- पक्षी, मौत तो एक दिन सभी को आएगी. इस दुनिया में हर धर्म के लोगों के कुछ अलग अलग रीति रिवाज़ और रस्में हैं. इन रस्मों में इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक के संस्कार शामिल हैं. हिन्दू धर्म में हर स्त्री और पुरुष को मरने के बाद आग से जला कर राख कर दिया जाता है और फिर उनकी अस्थियाँ गंगा में बहा दी जाती हैं.  वहीँ अगर बात किन्नरों की करें तो किन्नरों की दुनिया सबसे अधिक रहस्मयी मानी जाती है. किन्नरों से जुड़े राजों पर से पर्दा आज तक कोई नहीं उठा पाया है.

किन्नर एक ऐसा विषय हैं, जिन्हें पूरे देश में गोपनीय रखना ही ठीक समझा जाता है. परन्तु इसके बावजूद भी लोग किन्नरों से जुड़ी नई नई बातों को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि किन्नरों के मरने के बाद उनकी डेड बॉडी के साथ क्या क्या किया जाता है? अगर हाँ, तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको किन्नरों के अंतिम संस्कार से जुडी कुछ ऐसी जानकारियां बताने जा रहे हैं, जिन्हें शायद आपने पहले कभी ना सुना होगा और ना ही कभी देखा होगा.

ऐसे होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार

आम इंसानों की तरह किन्नरों की मौत को लेकर कई तरह के रीति रिवाज है. किन्नर की मौत के बाद उसको सबसे पहले सफेद कपड़े में लपेट दिया जाता है. इसके बाद उसकी डेड बॉडी से हर प्रकार के गहने एवं वस्तें निकाली जाती हैं और उसके शरीर पर किसी प्रकार की कोई भी बंधी हुई चीज नहीं छोड़ी जाती. ऐसा उनको इसलिए किया जाता है ताकि उनकी आत्मा आजाद हो जाए और किसी तरह के बंधन ले बंध कर वह धरती पर ना रह जाए. या फिर यूं मान लीजिए कि किन्नर की आत्मा की मुक्ति के लिए इस रसम को निभाया जाता है. इसके इलावा अंतिम संस्कार से पहले पार्थिव शरीर को जूते एवं चप्पलों से पीटा जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किन्नर द्वारा किए गए पापों से उस को हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके और उसके पापों का प्रायश्चित हो सके.

चोरी छिपे किया जाता है अंतिम संस्कार

गौरतलब है कि किन्नरों का अंतिम संस्कार सबसे चोरी छिपे किया जाता है ताकि कोई उसको देख ना सके. ऐसी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति किन्नर की अंतिम यात्रा को देख ले तो उस किन्नर का अगला जन्म भी किन्नर के रूप में ही होगा. इसलिए आम इंसान की अंतिम शव यात्रा वह दिन के समय निकाला जाता है जबकि किन्नरों की शव यात्रा को रात के समय निकालने का रिवाज है. आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि अधिकतर है किन्नर हिंदू धर्म को मानते हैं मगर इनके शव को जलाने की बजाय दफनाने का रिवाज सदियों से चलता आ रहा है.

मौत पर मनाया जाता है जश्न

जहां आम इंसान की मृत्यु पर परिजन इकट्ठे होकर मातम मनाते हैं, शोक मनाते हैं वहीं किन्नरों के साथ इसके बिल्कुल विपरीत किया जाता है. दरअसल किन्नरों की मौत का मातम नहीं मनाया जाता बल्कि उनके जाने पर जश्न मनाया जाता है. किन्नरों की मौत पर जश्न का कारण उनके नर्क रुपी जीवन से मुक्ति मिलना है. साथ ही आराध्य देव अरावन से यह कामना करते हैं कि अगले जन्म उस किन्नर को दोबारा किन्नर का रूप ना दें.

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