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आश्चर्यजनक: गाय के मरने के बाद सुहागिनों की तरह दी गयी अंतिम विदाई, फूट-फूटकर रोती रही महिलाएं

गाय मरने के बाद सुहागिनों की तरह दी गयी अंतिम विदाई: आज के समय में धीरे-धीरे लोगों के अन्दर से भावनाएं ख़त्म होती जा रही हैं। लोगों के दिल में जानवरों के लिए तो छोडिये इंसानों के लिए भी बड़ी मुश्किल से प्रेम देखने को मिलता है। लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं रही है। एक समय ऐसा भी था जब लोग इंसानों की तरह ही जानवरों से भी प्रेम करते थे। इंसानों और जानवरों का सम्बन्ध आदिकाल से है। शुरुआत में इंसान जानवरों को अपने इस्तेमाल के लिए रखता था। लेकिन धीरे-धीरे वह उनका दोस्त बनता गया।

कुछ लोगों के दिल में बरक़रार है जानवरों के लिए प्रेम:

अक्सर आपने कई लोगों को अपने कुत्ते को बच्चों की तरह प्रेम करते हुए देखा होगा। वहीँ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कुत्ता या किसी भी जानवर को देखते ही मारने के लिए दौड़ते हैं। हालाँकि आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके दिल में जानवरों के लिए प्रेम बरक़रार है। ऐसे लोग जानवरों को भी इंसानों की तरह ही ईश्वर की रचना समझते हैं और उनकी देखभाल करते हैं। भारत में प्राचीनकाल से ही गाय को एक पवित्र जानवर के रूप में माना जाता रहा है। लेकिन आज गायों की क्या स्थिति है किसी से छुपी हुई नहीं है।

परम्पराओं को निभाते देख हो जायेंगे हैरान:

भले ही लोग गायों को माता मानते हैं, लेकिन सड़क किनारे कई ऐसी गायें हैं जो प्लास्टिक का सेवन करके मर जाती हैं और किसी का ध्यान भी उनकी तरफ नहीं जाता है। लेकिन हाल ही में एक बहुत ही हैरान करने वाला मामला देखने को मिला है। जी हाँ लोगों को जानवरों से प्रेम करते हुए तो देखा गया है लेकिन इस कदर प्रेम करते हुए और इस तरह की परम्पराओं को निभाते हुए पहले कभी नहीं देखा गया था। आपको बता दें हाल ही में भोपाल में जानवर के प्रति प्रेम रखने का एक बहुत ही अद्भुत मामला देखने को मिला है।

नाम लेकर बुलाने पर पास चली आती थी गाय:

यहाँ मोहल्ले की महिलाओं के एक गाय की मौत के बाद उसे सुहागिनों की तरह विदाई दी। उस दौरान कई महिलाओं की आँखें नाम हो गयी थीं जबकि कई फूट-फूटकर रो भी रही थीं। जानकारी के अनुसार वो सभी महिलाएं काफी समय से उस गाय की सेवा कर रही थीं। गाय बीमार हुई और उसकी मौत हो गयी। जानकारी के अनुसार ब्यूटीपार्लर संचालक अर्चना जैन के मोहल्ले में 4 साल पहले एक गाय आई थी, जिससे उन्हें लगाव हो गया। गाय देखने में असमर्थ थी। लोगों के उसका नाम गौरी रख दिया। जब भी उसे इस नाम से बुलाया जाता था, वह पास चली आती थी।

पुरे सम्मान के साथ विदा किया गया नगर पालिका की गाड़ी में:

घर की एक दूकान को खाली करके उसमें गाय को रखा जाता था। उसे नियमानुसार खाना और चारा दिया जाता था। गाय कुछ दिनों से बीमार चल रही थी, इस वजह से उसका इलाज भी चल रहा था। इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गयी और जैसे ही उसकी मौत की खबर मोहल्ले वालों को हुई वहां भीड़ इकट्ठी हो गयी। गाय के खुरों में महिलाओं ने मेहँदी लगाई, चूड़ियाँ पहनाई, बिंदी लगाई और लाल साड़ी भी पहनाया गया। बाद में उसे पुरे सम्मान के साथ नगर पालिका की गाड़ी में विदा किया गया।

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