चाणक्य: बड़ा आदमी बनने के लिए कौवे से सीखनी चाहिए ये 4 बातें, कौन सी हैं वो बातें?

आचार्य चाणक्य पाटलिपुत्र (जिसे अब पटना के नाम से जाना जाता है) के महान विद्वान थे. चाणक्य को उनके न्यायप्रिय आचरण के लिए जाना जाता था. इतने बड़े साम्राज्य के मंत्री होने के बावजूद वह एक साधारण सी कुटिया में रहते थे. उनका जीवन बहुत सादा था. चाणक्य ने अपने जीवन से मिले अनुभवों को चाणक्य नीति में जगह दिया है.

चाणक्य नीति में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जिस पर यदि व्यक्ति अमल करे तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. सफलता निश्चय उसके कदम चूमने लगेगी. यदि व्यक्ति इन बातों का प्रयोग अपने निजी जीवन में करे तो उसे कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा. इन नीतियों में सुखी जीवन का राज छुपा है. नीतियों में बताई गई बातें आपको कड़वी लग सकती है पर हैं बिलकुल सत्य. आज हम आपको चाणक्य की किताब चाणक्य नीति में लिखी कुछ ऐसी बातें बताएंगे जो हमारे जीवन को एक सार्थक मोड़ दे सकती है. ये बातें हमें जीवन जीने का सही रास्ता बताते हैं और बताते हैं कि जीवन में क्या करना चाहिए और क्या नहीं. आज हम आपको चाणक्य द्वारा बताई गयी 4 ऐसी बातें बताएंगे जो आपके जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं. कौन सी हैं वो बातें? चलिए जानते हैं.

  • आचार्य चाणक्य का मानना है कि जैसे एक कौवा चौकन्ना रहता है और उसकी दृष्टि चारों तरफ बनी रहती है ठीक वैसे ही व्यक्ति को अपने चारों तरफ नजर बना के रखनी चाहिए. उसे हर तरह से चौकन्ना रहना चाहिए ताकि कोई उसे नुकसान ना पहुंचा सके. कौवा अपनी नजर चौकन्नी रख के खुद की रक्षा करता है और अपने लिए सही मौके की तलाश करता है. इसलिए हमें भी अपने हालात देखते हुए ही किसी भी काम को अंजाम देना चाहिए.
  • हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अभी हम अपनी लाइफ की कौन सी स्टेज पर हैं, और हमारे पास क्या-क्या मौके हैं. इन सब बातों पर हमें अपनी नजर बनायी रखनी चाहिए. कई बार जीवन में ऐसी मुश्किलें आ जाती हैं जिनसे उबरना नामुमकिन हो जाता है लेकिन हमें उन मुश्किलों से परेशान नहीं होना चाहिए. हमें उन मुश्किलों से परेशान होने की बजाय उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जिससे हमारी प्रॉब्लम सोल्व हो सकती है. इसलिए अपनी दृष्टि एक कौवे की तरह रखें और उसे हर तरफ घुमाएं.

इसके अलावा चाणक्य ने बताया है कि कुछ ऐसी बातें होती हैं जिसका जिक्र किसी से नहीं करना चाहिए.

व्यक्तिगत समस्या का जिक्र

चाणक्य नीति में लिखा है कि व्यक्ति को कभी भी अपनी व्यक्तिगत समस्या का जिक्र किसी दूसरे के साथ नहीं करना चाहिए. भले ही वह आपका कितना भी करीबी क्यों न हो अपनी निजी समस्या का उल्लेख किसी से नहीं करें. चाणक्य का मानना है कि समस्या का जिक्र करने पर लोग सामने तो दुख जताते हैं लेकिन पीठ पीछे बुराई कर खुशियां मनाते हैं.

अपने अपमान का जिक्र

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने अपमान के बारे में किसी से जिक्र नहीं करना चाहिए. यदि कोई आपका अपमान करता है तो उसका जिक्र कभी भी दूसरों के सामने न करें. चाणक्य का मानना है कि ऐसा करने से आपका अपमान और बढ़ता है और आपका मजाक भी उड़ाया जाएगा. यह आपकी इमेज को खराब कर सकता है.

पत्नी के चरित्र का जिक्र

चाणक्य ने यह भी कहा है कि मनुष्य को कभी भी दूसरे से अपनी पत्नी के चरित्र का उल्लेख नहीं करना चाहिए. अपनी पत्नी के स्वभाव और जीवन संबंधों के बारे में दूसरों को नहीं बताना चाहिए. ऐसा करने से आपकी ही नहीं बल्कि आपकी पत्नी की भी इज्जत जाती है और दूसरों को मजाक उड़ाने का मौका मिल जाता है. कुछ बातों को बताने से समस्या सुलझने की बजाय और उलझ जाती है.

व्यापार के संबंध में जिक्र

इसके अलावा चाणक्य नीति में कहा गया है कि अपने व्यापार संबंधी बातों का जिक्र कभी भी दूसरों के सामने नहीं करना चाहिए. व्यापार में लाभ-हानि की बातें कभी भी दूसरों से न करें. क्योंकि ऐसा करने से वह आपकी स्थिति से वाकिफ होंगे और जब आपको उनकी मदद की जरूरत होगी तब सहयोग नहीं मिल पायेगा.

इसी से संबंधित एक विडियो आज हम आपके लिए लेकर आये हैं. यह विडियो आपकी मदद करेगा कि आप आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गयी इन बातों को विस्तार और बेहतर तरीके से समझें.

देखे-

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