भगवान शिव की पूजा में वर्जित हैं ये 6 चीजें, प्रकोप से बचने के लिए ना करें इनका इस्तेमाल

भारत में सभी धर्म एक समान हैं. परंतु हिंदू भाषी लोगों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण भारत में हिंदू धर्म को सबसे ज्यादा माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को त्रिदेव कहा गया है. शिवजी की कल्पना एक ऐसे देव के रूप में की जाती है जो कभी संहारक तो कभी पालक होते हैं. भस्म, नाग, मृग चर्म, रुद्राक्ष आदि भगवान शिव की वेष-भूषा व आभूषण हैं. इन्हें संहार का देव भी माना गया है. इसी तरीके से भगवान शिव के कुल 12 नाम प्रख्यात हैं. पूरे भारत में शिव भगवान के भक्तों की संख्या सबसे अधिक है. शिव भगवान अपने अनोखे रूप की वजह से सबसे अलग भी दिखते हैं. महिला से लेकर पुरुष सभी उनकी भक्ति में लीन रहते हैं.

13 और 14 फरवरी को मनाया जा रहा है शिवरात्रि का महापर्व

भारत में आज और कल महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा. 13 और 14 फरवरी को पूरे भारतवर्ष में महाशिवरात्रि है. कहा जाता है कि भगवान शिव जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं उससे भी जल्दी उन्हें गुस्सा आता है. भगवान शिव के प्रकोप से हर कोई वाकिफ है. उनकी पूजा में अर्पित की जाने वाली सामग्री किसी दूसरे देवता को अर्पित नहीं की जाती. भगवान शिव को भांग, बेलपत्र, धतूरा बेहद प्रिय है. उनकी पूजा के दौरान इन सब चीजों को अर्पित करना बहुत जरूरी होता है. लेकिन कई बार लोग अनजाने में छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं. कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो भगवान शिव को नहीं चढ़ाई जातीं. लेकिन जानकारी के आभाव में लोग इन्हें भगवान शिव को चढ़ा देते हैं. इसलिए आज हम आपको उन सामग्रियों के बारे में बताएंगे जिनका इस्तेमाल शिव की पूजा में नहीं करना चाहिए.

भगवान शिव की पूजा में कभी भी केतकी के फूल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. पूजा में केवल कमल और कनेर के फूल का इस्तेमाल करें. भगवान शिव को लाल रंग के फूल भी पसंद नहीं हैं. इसलिए हो सके तो कमल और कनेर के फूल से ही पूजा करें.

महादेव की पूजा में हल्दी का इस्तेमाल करना वर्जित है. हल्दी को शिव का रूप माने जाने के कारण इसका प्रयोग पूजा में नहीं होता. इसलिए कभी भी भगवान शिव की पूजा में हल्दी का प्रयोग न करें.

एक कथा अनुसार, भगवान शिव ने असुर जलंधर का वध कर दिया था. पति के वध के बाद पत्नी वृंदा निराश होकर तुलसी में परिवर्तित हो गई. वृंदा ने भगवान शिव को अपने दैवीय तत्वों वाले पत्त्तों से वंचित कर दिया. इस वजह से भगवान शिव की पूजा में तुलसी चढ़ाना भी वर्जित है.

सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.

सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. अपने सौभाग्य में वृद्धि के लिए महिलाएं कुमकुम का इस्तेमाल करती हैं. इसके विपरीत भगवान शिव को विध्वसक और विनाशकर्ता कहा जाता है. इसलिए शिव की पूजा में सिंदूर का उपयोग नहीं किया जाता.

शिव को नारियल का पानी चढ़ाना भी वर्जित है. क्योंकि अन्य देवी-देवताओं की पूजा में जो सामग्री हम उन्हें अर्पित करते हैं उसका प्रसाद ग्रहण करते हैं. परंतु शिव की पूजा में ऐसा नहीं होता. इसलिए शिव को नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए.

शंख का भी प्रयोग भगवान शिव की पूजा में वर्जित है. एक कथा अनुसार, भगवान शिव के हाथों शंखचूर नामक एक राक्षस का वध हुआ था. इसलिए उनकी पूजा में शंख का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

तो ये थीं वो चीजें जिनका इस्तेमाल शिव की पूजा में नहीं होता. लेकिन जल, दूध, दही, शहद, घी, साड़ी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर और भांग भगवान शिव को अर्पित किया जाता है. इनसे स्नान कराने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मन की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.