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पुराण के अनुसार इन दिनों में पति-पत्नी को नहीं बनाना चाहिए शारीरिक सम्बन्ध, होता है यह नुकसान

हिन्दू धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा के साथ ही धर्म पुराणों में लिखी गयी बातों का पालन करना बहुत जरुरी होता है। ऐसा कहा जाता है कि धर्म व्यक्ति को अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। किसी भी धर्म पुस्तक में व्यक्ति को गलत काम करने की सीख नहीं दी गयी होती है। सभी धर्म पुस्तकें अच्छाई की बातों से ही भरी हुई हैं। जानकारों के अनुसार कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति धर्म में विश्वास करते हुए धार्मिक पुस्तकों की बातों का पालन करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है।

नहीं आती व्यक्ति के जीवन में कभी भी परेशानी:

आपको बता दें हिन्दू धर्म में कई महत्वपूर्ण पुराणों के बारे में बताया गया है। उन्ही में से कुछ पुराण बहुत ही ज्यादा खास हैं। इन पुराणों में लिखी गयी बातों पर अगर अमल किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी कोई परेशानी नहीं आती है। लेकिन आज के तेजी से आधुनिकता की तरफ बढ़ते इस समाज में धार्मिक पुस्तकों में लिखी गयी बातों का बहुत कम लोग ही पालन करते हैं। इसी वजह से आज ज्यादा से ज्यादा लोग परेशानियों से जूझ रहे हैं।

धार्मिक दृष्टि से माना जाता है बहुत बड़ा पाप:

आज हम आपको एक ऐसे महत्वपूर्ण हिन्दू पुराण के बारे में बताने जा रहे हैं, जो व्यक्ति के संबंधों के बारे में कुछ बहुत महत्वपूर्ण जानकारी देता है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं, ब्रह्मवैवर्त पुराण की। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कुछ ऐसे दिनों के बारे में बताया गया है, जिन दिनों में पति-पत्नी को समागम नहीं करना चाहिए। यह धार्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा पाप माना जाता है। जो पति-पत्नी इन दिनों में शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करते हैं, उन्हें जीवन में बुरे परिणामों का सामना करना पड़ता है।

इन दिनों में नहीं बनाना चाहिए पति-पत्नी को सम्बन्ध:

*- अमावस्या की रात को:

शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी पति-पत्नी को भूलकर भी अमावस्या को एक दुसरे के करीब नहीं आना चाहिए, यानी दोनों को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। ऐसा करने से उन दोनों के वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

*- पूर्णिमा की रात को:

जिस दिन पूर्णिमा की रात हो उस दिन भी पति-पत्नी को एक दुसरे के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

*- संक्रांति:

शास्त्रों के अनुसार संक्रांति का समय पति-पत्नी की नजदीकी के लिए अच्छा नहीं होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान दोनों का नजदीक आना दोनों के लिए बुरा होता है।

*- चतुर्थी-अष्टमी:

अगर तिथियों के अनुसार देखा जाए तो शास्त्रों में चतुर्थी और अष्टमी के दिन पति-पत्नी को दूर रहने की बात कही गयी है। इस दिन भी पति-पत्नी को शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

*- श्राद्ध या पितृपक्ष:

श्राद्ध या पितृपक्ष के दौरान तो भूलकर भी पति-पत्नी को एक दुसरे के करीब नहीं आना चाहिए। ऐसा करने पर पितृ नाराज हो जाते हैं। इसलिए इस दिन सम्बन्ध बनाने के बारे में सोचना भी किसी बड़े पाप से कम नहीं है।

*- व्रत:

जिस दिन स्त्री या पुरुष में से किसी ने व्रत रखा है उस दिन भी दोनों को एक दुसरे के करीब नहीं जाना चाहिए।

*- नवरात्री:

नवराति के नौ दिनों तक माता की पूजा-आरधना की जाती है। ऐसे में इन नौ दिनों के दौरान पति-पत्नी को एक दुसरे से दुरी बनाकर ही रहनी चाहिए। इन दिनों में सम्बन्ध बनाने के बारे में भूलकर भी न सोचें।

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