कौन है वो शख्स जिसने आप और अरविंद केजरीवाल के 20 विधायकों की कुर्सी खा ली

आपको पीके फिल्म याद है, जिसने आमिर खान के रोल को बेहद पसंद किया गया। फिल्म ने करोड़ों की कमाई की, अगर आपने फिल्म देखी है तो उससे पहले हुए उस विवाद को भी जानते होंगे जिसमें आमिर खान पर हिन्दू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। लेकिन उस एफआईआर के पीछे कौन था ये नहीं जानते होंगे। आज उसी शख्स ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी के 20 विधायकों की कुर्सी खा ली है। जिसके बाद बीसों विधायक सड़क पर आ गए हैं। इतना ही नहीं इस शख्स ने जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की नाक में भी दम कर रखा था।

आइए जानते हैं, उस शख्स का नाम जिसने दिल्ली की सियासत में भूचाल खड़ा कर दिया। जी हां, ये वकील प्रशांत पटेल हैं। जिनकी वजह से आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

सीधी साधी सी शीरत वाले, साधारण की कद गांठी के प्रशांत पटेल, यूपी के फतेहपुर जिला के रहने वाले हैं। जिन्होने अपनी एक शिकायत के बाद आम आदमी पार्टी की सेहत खराब कर दी है। जिसके बाद चुनाव आयोग के फैसले पर राष्ट्रपति ने मुहर लगाई है। लेकिन यहां ये भी जानना जरूरी है, कि आखिर जिन 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर केजरीवाल सरकार फंस गई है आखिर उसकी बुनियाद कैसे पड़ी। राष्ट्रपति तक कैसे पहुंचा यह सारा मामला। और इसे ले जाने वाले व्यक्ति यानी प्रशांत पटेल को ये आईडिया कहा से आया। ये भी जानना बेहद जरूरी है।

दरअसल प्रशांत को देश के बारे में लिखी गईं किताबों को पढ़ने का शौक है। ऐसे में एक किताब ने प्रशांत पटेल को AAP के 20 विधायकों के खिलाफ केस करने को प्रेरित किया। इस पूरे मामले को 30 साल के युवा वक़ील प्रशांत पटेल ने उजागर किया है। प्रशांत पटेल ने 19 जून 2015 को राष्ट्रपति के पास याचिका दायर की थी कि राजधानी एक्ट के सेक्शन 15 के मुताबिक आम आदमी पार्टी के 21 विधायक लाभ के पद के रहने के साथ विधायक नहीं रह सकते इसलिए इनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। दिल्ली असेंबली ने ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया है जिसमें संसदीय सचिवों के पद को लाभ के पद से बाहर रखा जा सके जिसके बाद तात्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर सुझाव मांगा था। जिसके बाद केंद्र ने अपने सुझाव और कानून के समेत विधि संम्वत सभी जानकारियां भेजीं। जिसके बाद अब राष्ट्रपति ने अपना निर्णय सुनाया है। दरसअल पटेल को दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एस के शर्मा की एक  किताब ‘दिल्ली सरकार की शक्तियां व सीमाएं’। यह किताब पढ़ने के बाद समझ में आया कि सीएम केजरीवाल ने अपने 21 विधायकों को असंवैधानिक तरीके से संसदीय सचिव बनाया है।

आपको बता दें, पिछले 8 सालों से दिल्ली में रह रहे प्रशांत ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की फिर एमबीए किया, जिसके बाद ग्रेटर नोएडा की चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने के बाद देश के कई न्यायालयों में वकालत कर रहे हैं। इस पूरे मामले से पहले प्रशांत ने आमिर खान की पीके मूवी में हिंदू देवी देवताओं के अपमान के खिलाफ फिल्म के निर्माता राजू हिरानी और आमिर खान के ऊपर एफआईआर भी दर्ज कराई थी।

इसके साथ ही प्रशांत पटेल को सेंसर बोर्ड की पूर्व प्रमुख लीला सैमसन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में शिकायत दर्ज करने को लेकर भी जाना जाता है। इतना ही नहीं जेएनयू में हुई नारेबाजी के मामले में कन्हैया कुमार ने जब बेल की अर्जी दी थी, तब भी पटेल ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप किया था।

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