आचार्य चाणक्य के बारे में हर व्यक्ति जानता है। किस तरह से आचार्य चाणक्य ने अपने ज्ञान और बुद्धि के बल पर नन्द वंश का खात्मा किया और चन्द्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठाया। खुद राजा ना बनकर उन्होंने महामंत्री बनकर राजा के साथ रहने का निर्णय लिया। उन्होंने जीवन में कई महान काम किये। आचार्य चाणक्य इतने बुद्धिमान थे कि उन्हें हर विषय की जानकारी थी। प्राचीनकाल में ही उन्हें अर्थशास्त्र, राजनीति और नीति शास्त्र का अच्छा ज्ञान था। उन्हें प्राचीनकाल का अर्थशात्री माना जाता है।

जब लोगों को अर्थशास्त्र का ज्ञान नहीं था, उन्होंने उस समय अर्थशास्त्र की बात की। साथ ही उन्होंने लोगों के जीवन को सँवारने के लिए कई ऐसे नीतियों के बारे में बताया जो उस समय तो महत्वपूर्ण थे ही, आज इतने हजार सालों के बाद भी उनका महत्व बना हुआ है। चाणक्य ने अपने ज्ञान को एक पुस्तक का रूप दिया, जिसे आज के समय में चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। चाणक्य नीति में कई ऐसी ज्ञान की बातें हैं, जिसका पालन कर व्यक्ति जीवन में नाम कमा सकता है।

आचार्य चाणक्य ने व्यक्ति के सुखी और श्रेष्ठ जीवन के लिए कई नीतियाँ बताई हैं। जो लोग इनके हिसाब से जीवन जीते हैं, उनके जीवन में कोई परेशानी नहीं होती है। साथ ही इन नीतियों का पालन करके व्यक्ति समाज में इज्जत और शोहरत भी पा सकता है। चाणक्य ने कुछ ऐसे लोगों और चीजों के बारे में बताया है, जिनके बीच से किसी व्यक्ति को भूलकर भी नहीं निकलना चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति परेशानी में पड़ जाता है।

इनके बीच से भूलकर भी ना निकलें:

जब दो ज्ञानी लोग आपस में बातचीत कर रहे हों तो उनके बीच से निकलकर उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि ज्ञानी से ज्ञानी मिले करे ज्ञान की बात। ऐसे में जब आप उनके बीच से निकलते हैं तो उनकी बातचीत में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसलिए ऐसा भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

अगर किसी जगह पर कोई ब्राह्मण आग के पास बैठा हो तो वहां से दूर से ही निकल जाना चाहिए। उनके बीच से निकलकर उनके काम में बाधा नहीं डालनी चाहिए। हो सकता है ब्राह्मण हवन या यज्ञ कर रहा हो। अगर उस स्थिति में आप उनके बीच से निकलते हैं तो उनके हवन या यज्ञ में रुकावट आ जाती है। जिससे आप पाप के भागी बनते हैं।

जब कोई स्वामी और उसका सेवक आपस में बातचीत कर रहे हों तो उसके बीच से नहीं निकलना चाहिए। हो सकता है मालिक अपने नौकर को कोई जरुरी काम के बारे में बता रहा हो और आपके बीच से गुजरने की वजह से वह अपनी बात ठीक से ना समझा पाए। ऐसे में बाद में परेशानी हो सकती है।

अगर किसी स्थान पर पति-पत्नी अकेले में बैठकर बातें कर रहे हों तो उनके बीच से निकलकर उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। अगर आप उनके बीच से निकलेंगे तो यह शास्त्रों के हिसाब से अनुचित होगा। ऐसा करने से उन दोनों का एकांत भंग होता है।

अगर कहीं बैल और हल एक साथ लगे तो तो उसके बीच से भी निकलने का प्रयास नहीं करना चाहिए। संभव है कि आप उसके बीच से निकलने के प्रयास में चोटिल हो सकते हैं। इसलिए जब भी कहीं आप बैल और हल साथ में देखें उनके बीच से निकलने की कोशिश ना करें।

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