इस शहीद जवान को पहले ही हो गया था अपनी मौत का अहसास, मौत से पहले कहीं थी ये बातें

पूरे देश में 15 जनवरी को आर्मी दे के रूप में मनाया जा रहा है। इस मौके पर हम आपको एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो शहीद जवान टिंकू की है। टिंकू ने अपनी माँ से वादा किया था कि वह वापस आएगा और उन्हें अमरनाथ यात्रा पर ले जायेगा। लेकिन वो घर आया भी तो तिरंगे में लिपटकर। बातचीत के दौरान शहीद जवान टिंकू की माँ सुंदरी देवी और पिता सुन्दर सिंह ने उसके जीवन के कुछ अनजाने पहलुओं के बारे में बताया।


पिता ने बताया कि टिंकू का जन्म 22 दिसंबर 1982 को पुणे के एक मिलिट्री हॉस्पिटल में हुआ था। टिंकू बचपन से ही आर्मी में जाना चाहता था। उस समय मैं आर्मी में हवलदार था। मुझे ही देखकर उसका भी जानें का मन करता था। जब भी वह मुझसे आर्मी में जानें की बात करता था, मैं हंसकर टाल देता था। टिंकू सबसे छोटा बेटा था। टिंकू दौड़ में काफी अच्छा था। उसने एक बार आर्मी अफसरों के सामने दौड़ में अच्छा परफॉर्म किया था। उसी समय अधिकारीयों ने बोला था देखना ये एक दिन जरुर फ़ौज में जायेगा।


2000 में टिंकू ने आर्मी की परीक्षा दी थी और राइफलमैन की नौकरी ज्वाइन की थी। नौकरी पानें के बाद वह तो बहुत खुश था, लेकिन उसकी माँ को इससे ज्यादा ख़ुशी नहीं हुई। उसकी माँ चाहती थी कि उसका बेटा और पढाई पढ़े। 2001 में वह अपनी ट्रेनिंग पूरी करके जम्मू के कुपवाड़ा में पोस्टिंग के लिए गया। नौकरी ज्वाइन करने के बाद वह एक बार छुट्टी में आया था। उसकी माँ सुंदरी देवी कहती हैं कि टिंकू को पहले ही अनहोनी के बारे में पता चल गया था। जब वह छुट्टी बिताकर वापस जा रहा था तो उसनें अपने एक दोस्त से बात की थी।

उसनें कहा था कि जिस जगह पर मैं जा रहा हूँ लगता है वहाँ से वापस आ पाना मुश्किल है। इसलिए तुमलोग मेरे घरवालों का ख़याल रखना। उस समय उसके दोस्तों ने उसकी बात को हँसी समझकर टाल दिया। उसनें उसी समय अपनी माँ से भी वादा किया था कि इस बार वह वापस आएगा तो अमरनाथ की यात्रा पर चलेगा। उस समय सभी को उसकी बातें मजाक लगती थी। एक दिन अचानक उसके कैम्प पर कुछ आतंकियों ने हमला बोल दिया। उस समय हमले के बारे में किसी को पहले से कुछ भी पता नहीं था। टिंकू ने उस समय दुश्मनों का जमकर सामना किया। लेकिनएक गोली टिंकू को आकार लग गयी।

गोली लगने के बाद भी वह दुश्मनों से लड़ता रहा। बाद में जंग लड़ते हुए 18 अक्टूबर 2001 को वह शहीद हो गया। उस समय नवरात्री का महिना चल रहा था। टिंकू की माँ ने बताया कि उस समय मैं किसी काम से बाहर गयी थी। घर आकार देखा तो घर के बाहर अफसरों की भीड़ इकट्ठी थी। उस समय मुझे कुछ समझ में नहीं आया। घरवालों ने मुझे एक कमरे में ले जाकर बिठा दिया। उसके बाद सेना के अधिकारीयों ने मेरे बेटे के शहीद होने की बात मेरे एक जानने वाले को बताई। उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह थे। हमें उम्मीद थी कि वो मिलने आएंगे लेकिन ना ही वो आये और ना ही उनका कोई प्रतिनिधि आया।