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डॉक्टर बनना चाहती थी बेटी, मगर किस्मत ने पलटा रुख और बदल गई जिंदगी

अमृतसर: आज के इस बदलते दौर में इंसान भी काफी बदल चुका है. अब लोगों की सहन शक्ति इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह छोटी से छोटी बात को भी दिल पर ले बैठते हैं. हमारे देश का उज्जवल भविष्य बच्चे हैं, लेकिन यही बच्चे आज काफी कमजोर पड़ चुके हैं. लोगों के बीच तनाव इतना बड चुका है कि उन्हें खुदखुशी के इलावा कोई दूसरा रास्ता दिखाई नहीं देता. आए दिन लोगों की आत्महत्याओं की ख़बर अख़बारों की सुर्ख़ियों में बनी ही रहती है. कुछ ऐसा ही एक और मामला हाल ही में अमृतसर से हमारे सामने आया है. दरसल, मेरिटोरियस स्कूल में पढ़ने वाली जालंधर के गांव जोहल निवासी 17 वर्षीय जैसमीन बुधवार सुबह 6.30 बजे पंखे से लटकी मिली. जब जैसमीन की दोस्त कमरे में पहुंची तो उसको फंदे से लटकता देख दंग रह गई.

जिसके बाद उसने पूरे हॉस्टल को इक्कठा कर लिया. फ़िलहाल जैसमीन को अमनदीप अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. जहाँ, उसकी हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई है. वहीँ पुलिस को भी अभी तक उसकी खुदखुशी की असली वजह पता नही चल पाई है.


दरअसल, बीते बुधवार को स्कूल में एग्जाम को लेकर कोचिंग चल रही थी.  जैसमीन की दोस्त ने बताया कि करीब 6:00 बजे वह क्लास के किताब लेने के बहाने हॉस्टल के कमरे में पहुंची थी.  जिसके बाद उसकी रूममेट ब्रश करके लौटी तो कमरे का हाल देखकर दंग रह गई. दरअसल, जैसमीन तब तक पंखे के साथ लटक रही थी जिसे देखकर उसकी रूममेट ने पूरे हॉस्टल में शोर मचा दिया. इसके बाद हॉस्टल की वार्डन ने जैसमीन को दुपट्टे से नीचे उतारा और उसको गुरु नानक देव हॉस्पिटल ले जाया गया.  वहां के डॉक्टर ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए केस लेने से इंकार कर दिया. जिसके बाद उसको अमनदीप हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया गया.  वही जैसमीन के मां-बाप का स्कूल मैनेजमेंट पर आरोप है कि वह जैसमीन की कई सारी बातें छुपाने का प्रयास कर रहे हैं.  जैसमीन के मां-बाप के अनुसार उनकी बेटी काफी होशियार थी जबकि स्कूल प्रशासन उसको नालायक और कमजोर बता रहा है.  मां बाप ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनकी बेटी ने दसवीं में 85% अंक हासिल किए थे और वह एक डॉक्टर बनना चाहती थी.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जैसमीन की मां कमलेश कुमारी ने बताया कि बीती क्रिसमस छुट्टियों में 19 दिसंबर को उनकी बच्ची घर आई थी. इसके बाद 26 दिसंबर को वह हॉस्टल वापस लौट गई.  कमलेश कुमारी ने बताया कि 2 दिन पहले मिली उनकी बच्ची से उन्हें ज़रा भी जाहिर नहीं हुआ कि वह सुसाइड कर सकती है या किसी बात से परेशान है.  कमलेश कुमारी ने बताया कि वह इस बार जाने से पहले बार बार बोल रही थी कि 3 महीने में वह वापस आ जाएगी.  कमलेश कुमारी दो दिन पहले ही जैसमीन को किताब देने अमृतसर पहुंची थी.  साथ ही उसने ₹600 भी जैसमीन को पॉकेट मनी के तौर पर दिए थे.  आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि साल 2016 में जैसमीन का दाखिला मेरिटोरियस स्कूल में करवाया गया था.

मिली जानकारी के अनुसार जैसमीन के पिता राकेश कुमार एक प्राइवेट ट्रांसपोर्ट में ट्रक  लोडिंग का काम करते हैं.  अभी कुछ ही साल पहले उनके बेटे का देहांत हो गया था जिसके बाद अब उनकी चार बेटियां है.  जैसमीन के चाचा दीपक ने बताया कि उसके पिता अपनी बच्चियों को बेटों से कम नहीं मानते थे.  इसके इलावा जैसमीन की बड़ी बहन मीनाक्षी  फिजियोथेरेपी कर रही है.  राकेश कुमार ने बताया कि वह अपनी बेटियों को बड़ी अफसर बनाना चाहते थे लेकिन उनके साथ ही अनहोनी हो जाएगी ऐसा उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था.

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