भाग्यशाली होते हैं ऐसे पुरुष जिनकी पत्नी में होते हैं ये चार गुण,साथ ही होती है घर में खूब बरकत

हिन्दू धर्म में स्त्रियों का ख़ास महत्व है। हिन्दू धर्म में महिला को देवी का दर्जा दिया गया है। पत्नी को अर्धांगिनी कहा जाता है यानी पति का आधा अंग। महाभारत में भीष्म पितामह ने कहा था कि किसी भी महिला को हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि उसी से घर की तरक्की और वंशवृद्धि होती है। पत्नी के खुश रहने से घर में बरकत होती है और घर में पैसा भी आता रहता है। इसके उलट जिस घर की महिलाएँ हमेशा दुखी रहती हैं, वहाँ हमेशा गरीबी का पहरा रहता है। पत्नी के कुछ ख़ास गुणों की वजह से ही उन्हें लक्ष्मी कहा जाता है।

महाभारत के अलावा अंगिरा और याज्ञवल्क्य स्मृति के साथ आपस्तम्ब धर्म सूत्रों मे भी पत्नी के गुणों और उसके सम्मान से जुड़ी कई बातें बताई गयी हैं। इसी तरह कई हिन्दू धर्मग्रंथों में पत्नी से जुड़े गुण और अवगुणों के बारे में बहुत कुछ बताया गया है। गरुण पुराण के एक श्लोक में भी पत्नी के कुछ गुणों के बारे में बताया गया है। इसके अनुसार जिस व्यक्ति की पत्नी में ये चार गुण होते हैं, उन्हें खुद को भाग्यशाली समझना चाहिए। पत्नी के इन गुणों की वजह से घर में कभी धन-दौलत की कमी नहीं होती है और हमेशा सुख-शांति भी बनी रहती है।

सा भार्या या गृहे दक्षा सा भार्या या प्रियंवदा।
सा भार्या या पतिप्राणा सा भार्या या पतिव्रता।। (108/18)

इसका मतलब जो पत्नी गृहकार्य में दक्ष है, जो प्रियवादिनी है, जिसके पति ही उसके प्राण हैं और जो पतिपरायणा है, वास्तव में वही पत्नी है।

हर पत्नी में होने चाहिए यें चार गुण:

गृहकार्य से तात्पर्य घर के कामों से है। यानि जो पत्नी घर के सभी कामों जैसे भोजन बनाना, साफ-सफाई करना, घर को सजाना, कपड़े एवं बर्तन साफ़ करना, बच्चे की जिम्मेदारी अच्छे से निभाना, घर आये किसी मेहमान का अच्छे से स्वागत करना, कम चीजों में अच्छे से घर चलाने में माहिर होती है, उसे ही गृहकार्य में दक्ष माना जाता है। इन गुणों की वजह से हर पत्नी अपने पति की प्रिय होती है।

हर पत्नी को अपने पति से मीठी वाणी में बात करनी चाहिए। इस तरह से बात करने पर पति भी पत्नी की बात को ध्यानपूर्वक सुनता है और उसकी सभी इच्छाओं को पूरी करने की कोशिश करता है। पति के साथ ही घर के अन्य सदस्यों जैसे सास-ससुर, देवर, जेठ-जेठानी, ननद से भी प्रेमपूर्वक बात करना चाहिए। अपने बातचीत के तरीके से ही पत्नी घर के सदस्यों की चहेती बन जाती है।

जो पत्नी अपने पति को ही अपना सबकुछ मानकर हमेशा उसके आदेशों का पालन करती है, उसे धर्मशास्त्रों में पतिपरायण या पतिव्रता कहा गया है। पतिव्रता स्त्री हमेशा अपने पति के आदेशों का पालन करती है और कभी भी दिल दुखाने वाली बात नहीं करती है। पति को दुःख की बात बताते वक़्त वह संयम के साथ बताती है। ऐसी स्त्री अपने पति के अलवा कभी किसी अन्य पुरुष के बारे में नहीं सोचती हैं।

एक पत्नी के लिए सबसे बड़ा धर्म यही होता है कि वह अपने पति और उसके परिवार की भलाई करे और भूलकर भी कोई ऐसा काम ना करे, जिससे सबका दिल दुखे। गरुण पुराण के अनुसार जो पत्नी प्रतिदिन स्नान करके अपने पति के लिए सजती-संवरती है, कम बोलती हो तथा सभी शुभ चिन्हों से युक्त होती हो। जो हमेशा धर्म का पालन करती हो और अपने पति का हित करती है, उसे ही सही मायनों में पत्नी मानना चाहिए।