भीमा-कोरेगाँव हिंसा: दलित-मराठा संघर्ष की रणनीति हो चुकी थी दो दिन पहले ही तैयार, जानें

मुंबई: सोमवार को पुणे में शुरू हुआ दलित आन्दोलन धीरे-धीरे पुरे महाराष्ट्र में फैल चुका है। आपको बता दें इस आन्दोलन का सम्बन्ध 200 साल पुराने ब्रिटिश –पेशवा से सम्बन्ध नहीं है। इसे लेकर राजनीति को गरमाने के पीछे के इतिहास के कई पन्ने को खोला जा रहा है। भीमा-कोरेगाँव युद्ध स्मारक पर सोमवार को उमड़े लाखों दलितों के साथ शुरू हुए मराठा संघर्ष की कहानी दो दिन पहले से ही लिखी जा चुकी थी। पुणे से लगभग 30 किलोमीटर दूर अहमदनगर रोड पर स्थित भीमा-कोरेगाँव के नजदीक ही वढू बुदरक गाँव है।

भीमा नदी के किनारे स्थित इसी गांव में औरंगजेब ने 11 मार्च, 1689 को छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े पुत्र और तत्कालीन मराठा शासक संभाजी राजे भोसले और उनके साथी कवि कलश को क्रूरता से मार दिया था। ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने संभाजी राजे के शरीर के चार टुक़़डे करके फेंक दिए थे। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उसी गांव में रहने वाले महार जाति के गोविंद गणपत गायकवाड ने मुगल बादशाह की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए संभाजी के क्षत-विक्षत शरीर को उठाकर जोडा और उनका अंतिम संस्कार किया।

इसके बाद गुस्साए हुए मुगलों ने गोविन्द गायकवाड़ की हत्या कर दी थी। गोविन्द गायकवाड़ को सम्मान देने के लिए वढू बुदरक गाँव में संभाजी के नजदीक ही उनकी भी समाधी बनायी गयी। जानकारी के अनुसार भीमा कोरेगांव में पेशवा-ब्रिटिश युद्ध की 200वीं बरसी धूमधाम से मनाए जाने के अवसर पर वढू बुदरक गांव में गोविंद गायकवाड की समाधि को भी सजाया गया था। लेकिन 30 दिसंबर, 2017 की रात कुछ असामाजिक तत्वों ने वहाँ की सजावट को नुकसान पहुँचाया और समाधि पर लगा नामपट क्षतिग्रस्त कर दिया।

स्थानीय दलितों का कहना है कि यह काम मराठा समाज के कुछ उच्च वर्ग के लोगों ने श्री शिव प्रतिष्ठान के संस्थापक संभाजी भिडे गुरजी और समस्त हिंदू अघाडी के अध्यक्ष मिलिंद एकबोते के भड़काने पर किया। सोमवार को हुए दलित-मराठा संघर्ष के लिए इस घटना को भी एक बड़ा योगदान माना जा रहा है। सोमवार को लाखों दलितों के इकट्ठा होने से ठीक पहले की शाम पेशवाओं का निवास रहे पुणे के शनिवारवाडा के बाहर यलगार परिषद का आयोजन किया गया था।

इस परिषद में दलित नेता व बाबा साहब के भतीजे प्रकाश आंबेडकर के साथ गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला और जेएनयू के वामपंथी छात्रनेता उमर खालिद शामिल हुए। मेवाणी ने इस परिषद में भडकाऊ भाषण दिया। भाजपा और संघ को नया पेशवा बताते हुए सभी दलों को उनके विरद्ध एकजुट होने का आह्वान किया।