राजनीति

भारत की शक्तिशाली सिंघम महिला ऑफिसर सोती हैं ज़मीन पर, वजह जानकर सन्न रह जाएंगे आप!

बहराइच: जहां एक समय में महिलाओं को  कमजोर एवं मजबूरी का नाम दिया जाता था.  वही आज के बदलते समय में औरतों ने अपनी एक नई पहचान हासिल कर ली है.  आज के इस समय में हम आपको एक ऐसी महिला से मिलवाने जा रहे हैं,  जिसको लोग उसके नाम से ज्यादा “सिंघम” और “आयरन लेडी” के नाम से जानते हैं.  दरअसल, आज हम बात कर रहे हैं सड़क से संसद तक मशहूर पीपीएस अधिकारी श्रेष्ठा ठाकुर की.  एक समय में पढ़ाई के दौरान  श्रेष्ठा मनचलों की हरकतों का शिकार हो चुकी थी. परंतु, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई को आगे जारी रखा.  एक रिपोर्ट के अनुसार श्रेष्ठा ठाकुर को किसी भी लड़की को रास्ते में असुरक्षित महसूस करवाना पसंद नहीं करती.  आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि श्रेष्ठा इस समय यूपी के बहराइच में सीईओ पद पर तैनात हैं और साथ ही वह खुद खाना बनवाकर अपने कुत्तों को खिलाती हैं.

एक समय में बुलंदशहर में भाजपा विधायक से श्रेष्ठा की काफी बहस हो गई थी.  परंतु, कानपुर की रहने वाली श्रेष्ठा अब लोगों के लिए एक गर्व बन चुकी हैं.  श्रेष्ठा ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि वह अक्सर जमीन पर सोती हैं और अपना बिस्तर इस तरह से लपेट कर सुबह उठती है, ताकि अगले दिन ही उनका ट्रांसफर हो तो उन्हें कोई दिक्कत ना आए.

इसके अलावा इस आयरन लेडी को देश की महिलाओं के बारे में काफी फिक्र रहती है.  भारत देश की लड़कियों की सुरक्षा के लिए यह आयरन लेडी ना केवल उन्हें कानूनी तौर पर मदद करती है बल्कि शारीरिक तौर पर भी मजबूत बनाने के लिए उन्हें ताइक्वांडो सिखाती हैं.

इंटरव्यू के दौरान आयरन लेडी ने बताया कि जैसे आईपीएस नवनीत सिकेरा ने न्याय ना मिलने के कारण अपनी आईटीआई नौकरी छोड़कर आईपीएस की पढाई की और न्यायप्रिय अधिकारी के रुप में फेमस हुई, ठीक वैसे ही जब वह कानपुर में शिक्षा ग्रहण कर रही थी तो दो बार मनचलों ने छेड़खानी की. इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें एक ऑफिसर बनने की जरूरत है ताकि वह अपनी और बाकी लड़कियों की रक्षा कर पाए.  इसके बाद ही 2012 में पीपीएस क्वालीफाई करके आयरन लेडी का खिताब हासिल कर लिया.


श्रेष्ठा के पिता एस पी सिंह भदोरिया और माता मिथलेश भदोरिया कि वह सबसे छोटी संतान है.  इंटरव्यू के दौरान श्रेष्ठा ने बताया कि उनके बड़े भाई मनीष प्रताप सिंह का उनके ऑफिसर बनने में बहुत बड़ा सहयोग है.  इसके इलावा यह आयरन लेडी लाचार और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने में भी पीछे नहीं हटती.  सिस्टर ने बताया कि 1 दिन में सड़क के किनारे चल रही थी तभी वहां 9 से 10 साल का लड़का भीख मांग रहा था उसे इस हाल में देखकर श्रेष्ठा ने अपना सारा खाना उस बच्चे को दे दिया.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि श्रेष्ठा की शुरू से लेकर आखिर तक की पढ़ाई कानपुर में ही पूरी हुई.  श्रेष्ठा की ग्रेजुएशन के बाद अक्सर लोग उसको ताने मारते थे कि उसको घर से अकेले बाहर नहीं जाना चाहिए इन्हीं तानों से तंग आकर उसने पढ़ाई को अपनी पहचान बना लिया और आज वह आयरन लेडी बन चुकी है.

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